फर्टिलाइजर रैली स्थल का निरीक्षण करते आईजी लॉ एंड ऑर्डर एचआर शर्मा। साथ में कमिश्नर, डीएम, डीआईजी, एसएसपी व अन्य ।
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ढाई दशक बाद एक साथ प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल समेत कई विभागों के केंद्रीय मंत्री, इन सभी की सुरक्षा में तैनात भारी भरकम सुरक्षा व्यवस्था और कई जिलों की पुलिस, आरएएफ, पीएसी आदि के इंतजाम को लेकर प्रशासनिक महकमे की हालत खराब है। गाड़ियों के इंतजाम से लेकर उनके ठहरने तक की व्यवस्था को लेकर प्रशासन हलकान है। पिछले सप्ताह भर से सुबह से बैठकों और कार्यक्रम स्थल के निरीक्षण का जो दौर शुरू हो रहा है वह आधी रात तक चल रहा है।
इसके पहले ऐसी स्थिति 1989 में बनी थी। मौका था पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के इंजीनियरिंग कालेज में प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री समेत कई विभागों के केंद्रीय और राज्यमंत्री के अलावा तमाम विभागों के अफसरों के साथ बैठक का । इसके बाद नरसिम्हा राव, अटल बिहारी बाजपेयी समेत कई प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री तो तमाम मौकों पर आए पर उनके इंतजाम आदि को लेकर प्रशासन इतने तनाव में नहीं था जितना प्रधानमंत्री मोदी की रैली को लेकर है। तीन दिन पहले आई प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आगमन की सूचना ने प्रशासन और पुलिस के अफसरों के माथे पर और बल ला दिया है।
सर्किट हाउस समेत तमाम गेस्ट हाउस में प्रधानमंत्री की सुरक्षा में लगे एनएसजी समेत कई सुरक्षा एजेंसियों के अफसर जमे हुए हैं। बाकी बचे गेस्ट हाउस और होटलों में प्रदेश भर से ड्यूटी में आए अफसरों और भाजपा नेताओं को ठहराया गया है। बावजूद इसके अब भी कमरों और गाड़ियों की व्यवस्था को लेकर प्रशासन पर दबाव बना हुआ है। यह स्थिति तब है जब आरएएफ और पीएसी को विभिन्न स्कूलों में ठहराया गया है और उन्हीं की तरफ से उनके भोजन आदि की भी व्यवस्था की जा रही है।