आरिफ (बीच में) के घर लौटने खुशी मनाते पिता व बहन।
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घर में चारों ओर खुशियां ही खुशियां थीं। लोग एक-दूसरे का मुंह मीठा करा रहे थे। घर के बड़े-बुजुर्ग अल्लाह का शुक्रिया अदा कर रहे थे। माता-पिता को तो अपने मुकद्दर पर ही यकीन नहीं हो रहा था। बहन फूले न समा रही थी। दरअसल नगर निगम में लाइब्रेरियन के रूप में कार्यरत शरीफ अहमद खां का 22 साल पहले खोया बेटा आरिफ घर जो लौट आया था।
बात 1994 की है जब 10 साल का आरिफ ऊंचवां के स्कूल में पढ़ता था। एक दिन स्कूल के तीन लड़के एक साथ लापता हो गए। सभी को उनके घर वालों ने खूब तलाशा, लेकिन उनका पता नहीं चला। आरिफ की मां को तो इतना सदमा लगा कि वो पीजीआई में तकरीबन एक महीने तक भर्ती रहीं। पिता शरीफ बेटे की तलाश में कहां-कहां नहीं गए। पैतृक घर दिल्ली, मुंबई और हर उस स्थान पर उन्होंने बेटे को खोजा जहां उसके मिलने की संभावना थी। जो जहां बताता, वह वहां चले जाते पर हर जगह से उन्हें निराशा ही मिली।
बकौल शरीफ, लोग बेटे के साथ अनहोनी की बात करते थे, लेकिन मेरे ख्वाब में अक्सर वह दिखता था। अब जाकर खुदा ने हमें हमारे से बेटे से मिला दिया। हालांकि आरिफ 29 जुलाई को मेरे भाई के घर आया था, लेकिन उस समय मन में कई तरह की उधेड़बुन थी। कई साक्ष्यों और बातों से अब तसल्ली हो गई है कि खुदा ने मेरे बेटे को ही मुझसे मिलाया है। बेटी भी अपने भाई से मिलकर बेहद खुश है। बेटी का जन्म 2002 में हुआ था। आज वो पहली बार अपने भाई से मिली।