मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर और स्टाफ की लापरवाही एक परिवार पर भारी पड़ गई। घर वाले मरीज को छोड़कर रुपये लेने चले गए, इतने में ही मरीज की मौत हो गई।
डॉक्टरों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घर वाले जब लौटे और उन्हें इस बात की जानकारी हुई तो वे भड़क गए और हंगामा करने लगे।एसआईसी से मामले की शिकायत की, मगर मेमो थाने भेजे जाने की वजह से लाश नहीं मिल सकी।
खोराबार थाना क्षेत्र के अकोलहिया गांव निवासी लालमन के 32 वर्षीय पुत्र उमेश को लीवर में इंफेक्शन होने पर 12 अप्रैल को घर वालों ने मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। वार्ड नंबर 14 के बेड नंबर 34 पर भर्ती उमेश का इलाज हो रहा था। शुक्रवार की सुबह उनका छोटा भाई दिनेश रुपये की जरूरत पड़ने पर गांव चला गया और भतीजे रवींद्र को छोड़ गया था। लेकिन इसी बीच रवींद्र भी किसी काम से कहीं चला गया और शाम 4:45 बजे मरीज की मौत हो गई। जब तक रवींद्र लौटकर आता, उसके पहले ही डॉक्टरों ने शव को मर्चरी भेजवा दिया और थाने पर भी इसकी जानकारी मेमो के जरिए भेज दी।
घर वालों को जब इस बात की जानकारी हुई तो सभी भड़क गए और हंगामा करने लगे, हालांकि उस दिन पोस्टमार्टम नहीं हो सका। शव को वापस दिलाने की मांग को लेकर दिनेश शनिवार की सुबह एसआईसी के पास पहुंचा और डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाने लगा। एसआईसी ने लिखित शिकायत करने को कहा, ताकि शव दिलाया जा सके। मगर मेमो थाने भेजे जाने की वजह से बिना पोस्टमार्टम के शव वापस नहीं दिया जा सका।
मृतक का भाई शिकायत लेकर मेरे पास आया था। उसे लिखित शिकायत करने को कहा गया, लेकिन वह लौटकर नहीं आया।
- डॉ. एमक्यू बेग, एसआईसी, मेडिकल कॉलेज