गोरखपुर। इस वर्ष अब तक जापानी इंसेफेलाइटिस से होने वाली मौतों में कमी आई है। जहां पिछले वर्ष गोरखपुर और बस्ती मंडल से आने वाले मरीजों में अक्टूबर तक मेडिकल कालेज परिसर में स्थित एनआईवी पुणे की इकाई की जांच में 141 मरीजों में जेई की पुष्टि हुई थी, वहीं इस वर्ष अब तक केवल 91 इंसेफेलाइटिस मरीजों में जेई के वायरस पाए गए हैं। जबकि इनमें से 17 मरीज बिहार के रहने वाले हैं। एनआईवी की जांच में हुई जेई की पुष्टि का यह आंकड़ा पिछले वर्ष के मुकाबले 35 फीसदी कम है।
एनआईवी इकाई के आंकड़ों के अनुसार बस्ती मंडल के सिद्घार्थनगर और गोरखपुर मंडल के कुशीनगर जिले की स्थिति अभी चिंताजनक है। 91 जेई मरीजों में सिद्घार्थनगर के 19 तो कुशीनगर के 15 मरीज शामिल हैं। पिछले वर्ष अब तक सिद्घार्थनगर में 15 तो कुशीनगर में 21 मरीजों में जेई के वायरस पाए गए थे। सबसे ज्यादा सुधार गोरखपुर को लेकर है। जहां इस वर्ष अब तक आठ मरीजों मेें जेई की पुष्टि हुई है, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 15 थी। पिछले वर्ष के मुकाबले जेई से होने वाली मौतों की संख्या कम हुई है। जहां पिछले वर्ष अबतक 57 जेई मरीजों की मौत हुई थी, वहीं इस वर्ष यह संख्या 34 ही है।
इस बाबत मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. केपी कुशवाहा ने कहा कि जेई पर लगाम टीकाकरण की वजह से लग सकी है, हालांकि इसे लेकर अभी और प्रयास की जरूरत है। लेकिन जब तक एंटेरो वायरस से लड़ने का रास्ता नहीं निकलेगा तब तक इंसेफेलाइटिस से निजात नहीं मिलने वाली है क्योंकि अब ज्यादातर मामले एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के ही आ रहे हैं।
जिलेवार जेई मरीजों का आंकड़ा
कुल मरीज : 91 (इनमें 34 की मौत हो गई)
गोरखपुर मंडल : देवरिया-5, गोरखपुर-8, महराजगंज-10, कुशीनगर-15
बस्ती मंडल : संतकबीरनगर-2, बस्ती- 6, सिद्घार्थनगर-19
(आंकड़े एनआईवी के अनुसार)