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चित्रांश समाज ने कलम-दवात की पूजा की

Sun, 26 Oct 2014 05:30 AM IST
Gorakhpur
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गोरखपुर। चित्रांश समाज के लोगों ने शनिवार को श्रद्घा के साथ कलम-दवात पूजा पर्व मनाया। कई जगहों पर सामूहिक पूजा के अलावा चित्रांश परिवारों ने अपने घरों में भी कलम-दवात पूजा की। इस दौरान भगवान चित्रगुप्त की पूजा के साथ हवन भी की गई।
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बक्शीपुर स्थित चित्रगुप्त मंदिर में पूजा के लिए पहुंचे लोगों को पहले ही भगवान चित्रगुप्त महाराज के चित्र से युक्त पृष्ठ दिए गए थे। इन पर विभिन्न देवी-देवताओं एवं भगवान चित्रगुप्त के अनेक नाम लिखकर चित्रांश समाज के लोगों ने उन्हें नमन किया। इसके बाद सामूहिक हवन और आरती का आयोजन हुआ। प्रसाद वितरण के साथ पूजा का समापन हुआ। इस दौरान दुर्गा प्रसाद श्रीवास्तव, डॉ. वीके सिन्हा, बसपा नेता डॉ. अशोक कुमार श्रीवास्तव, मोरारजी, अनिल कुमार श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे। चित्रगुप्त मंदिर सभा ने भी सामूहिक रूप से कलम-दवात पूजा का आयोजन किया। सभा के अध्यक्ष अजय कुमार श्रीवास्तव एवं सचिव अखिलेंदु श्रीवास्तव की देखरेख में पूजा हुई। श्री चित्रगुप्त समिति बशारतपुर में कमलाकांत श्रीवास्तव की देखरेख में आयोजन हुआ। कायस्थ सेवा संस्थान के बक्शीपुर स्थित कार्यालय पर संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोरख लाल श्रीवास्तव की देखरेख में पूजा का आयोजन हुआ। चित्रांश कल्याण समिति ने सूरजकुंड कॉलोनी स्थित पानी टंकी पार्क में सामूहिक पूजन किया। मुख्य यजमान सुशील कुमार सिन्हा रहे। कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठ लोगों को अंगवस्त्र एवं रामचरित मानस देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान जेपी नारायण, बृजेश कुमार, प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, डॉ. मंगलेश, पीके श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे। चित्रगुप्त समिति धर्मपुर ने अपने कार्यालय में भगवान चित्रगुप्त का वार्षिक पूजन उत्सव सांस्कृतिक आयोजन के साथ मनाया। इस दौरान विनोद कुमार श्रीवास्तव, विनय कुमार श्रीवास्तव, प्रेमचंद्र गौड़, नवल किशोर, कमलकांत आदि मौजूद रहे।
चित्रगुप्त प्रतिमाओं का विसर्जन आज
चित्रगुप्त मंदिर सभा के मीडिया प्रभारी संजय वर्मा ने बताया कि भगवान चित्रगुप्त पूजन उत्सव का समापन रविवार को नगर में स्थापित सभी चित्रगुप्त प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ होगा। शाम सात बजे नगर में स्थापित सभी प्रतिमाएं विसर्जन के लिए राजघाट जाने की खातिर मंदिर के प्रवेश द्वार पर एकत्र होंगी। आरती, पूजन एवं प्रसाद वितरण के बाद शोभायात्रा के रूप में प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए राजघाट ले जाया जाएगा।
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