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पुरानी मार्कशीट ही बांटने लगा विश्वविद्यालय

Mon, 20 Oct 2014 05:30 AM IST
Gorakhpur
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गोरखपुर। रिजल्ट घोषित किए जाने के बाद भी मार्कशीट न देने पर बने दबाव से उबरने के लिए गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन ने फौरी तौर पर रास्ता निकाल लिया है। फिलहाल मालखाने में पड़ी सादी मार्कशीट पर प्रिटिंग कर उसे जारी किया जा रहा है। दरअसल मार्कशीट को लेकर विद्यार्थियों की परेशानी को जब ‘अमर उजाला’ ने प्रकाशित किया तो चर्चाओं से आजिज आकर विश्वविद्यालय को यह फैसला लेना पड़ा है।
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2013-14 शिक्षण सत्र को समाप्त करने में हो रही देरी के अंतराल को कम करने के लिए विश्वविद्यालय हर रोज दर्जनों रिजल्ट घोषित कर रहा है। लेकिन मार्कशीट जारी न होने से विद्यार्थी परीक्षा पास करने के बाद भी अपने को बेनतीजा ही समझ रहे हैं। पिछले सप्ताह तक जब ऐसे विद्यार्थियों की संख्या दो लाख के पार हो गई तो उनकी बेचैनी बढ़ गई। खासकर उन विद्यार्थियों की जो कोर्स के अंतिम वर्ष में थे और मार्कशीट न मिलने से कहीं और प्रवेश के लिए प्रयास नहीं कर पा रहे थे। ऐसे विद्यार्थी हर रोज विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में मार्कशीट और माइग्रेशन की उम्मीद को लेकर चक्कर लगा रहे थे लेकिन विश्वविद्यालय की ओर से उन्हें कोई सार्थक जवाब नहीं मिल रहा था। ‘अमर उजाला’ ने विद्यार्थियों की परेशानी को समझा और उसे 28 सितंबर के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर प्रकाशित होते ही विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली में अचानक तेजी आ गई। टेंडर के फेर में फंसी मार्कशीट की प्रिंटिंग का इंतजार न करते हुए विश्वविद्यालय के मालखाने में पड़ी पुरानी सादी मार्कशीट की तलाश होने लगी। तलाश में 50 हजार से अधिक मार्कशीट मिली तो तत्काल उसे ही जारी करने का निर्णय विश्वविद्यालय ने ले लिया। पुरानी मार्कशीट से सबसे पहले स्नातक अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को संतुष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि द्वितीय और तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों को अभी भी मार्कशीट का इंतजार है।
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