गोरखपुर। सदर सांसद योगी आदित्यनाथ लव जेहाद को अंतरराष्ट्रीय साजिश के साथ छोटे-मोटे दंगों का कारण मानते हैं। एक ओर वह अल्पंसख्यकों की ज्यादा आबादी वाले इलाकों में दंगे होने की बात पर कायम हैं तो हिंदू युवा वाहिनी (हियुवा) के गठन को भी सही ठहराते हैं। गोरक्ष पीठ के उत्तराधिकारी योगी ने अमर उजाला से खास बातचीत में कई विवादित मुद्दों पर बेबाकी से राय रखी।
0 लव जेहाद से आपका क्या अभिप्राय है ?
लव जेहाद एक अंतरराष्ट्रीय साजिश है। इसकी शुरुआत सबसे पहले केरल से हुई। इस पर केरल फिर कर्नाटक हाईकोर्ट और उससे पहले 2006 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चिंता व्यक्त की थी। कहा था कि हिंदू बालिकाओं का अपहरण कर उनका धर्मांतरण कराया जा रहा है। लव के नाम पर धर्मांतरण नहीं होना चाहिए। छोटे-छोटे दंगों के पीछे यही कारण है। मुजफ्फरनगर की घटना इसका उदाहरण है। केरल के मुख्यमंत्री बीएस अच्युतानंद ने कहा था कि लव के नाम पर धर्मांतरण मुस्लिम राज्य स्थापित करने की साजिश है। इस पर रोक लगनी चाहिए।
0 सांप्रदायिक हिंसा बिल पर आपकी क्या राय है ?
1947 में देश का विभाजन क्यों हुआ, उसे विस्मृत कर दिया गया। देश में एक ऐसा वर्ग है जो देश के संविधान को नहीं मानता। वह कहते हैं कि हम शरीयत को मानेंगे। देश में अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग कानून नहीं होगा। आजादी के बाद दंगे के सच को सामने लाना होगा। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक 1971 में 32 सांप्रदायिक दंगे हुए थे। जिनमें से 29 एक ही संप्रदाय के लोगों ने किए थे। तीन दंगे आपसी विवाद के कारण हुए। उसे सरकार के दबाव में सार्वजनिक नहीं किया गया।
0 आप का कहना है कि जहां अल्पसंख्यक ज्यादा हैं, वहां दूसरे वर्ग के लोग सुरक्षित नहीं हैं ?
हां इस बात पर अब भी कायम हूं। जहां पर अल्पसंख्यकों की आबादी 40 प्रतिशत से अधिक है, वहां दूसरे समुदाय के लोगों का रहना मुश्किल है। यदि ऐसा नहीं होता तो कश्मीर से बहुसंख्यक समाज पलायन क्यों करता। जहां पर 20 प्रतिशत आबादी अल्पसंख्यक समुदाय की है वह पर छिटपुट घटनाएं होती हैं। छेड़खानी, गोकसी व अपहरण जैसी घटनाएं बाद में विवाद का कारण बन जाती हैं।
0 हिंदू युवा वाहिनी के गठन का औचित्य क्या है ?
हिंदू युवा वाहिनी का गठन 2002 में हुआ था। यह एक गैर राजनीतिक संगठन है। 1971 मेें भारत-पाक युद्ध में पराजय के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टों ने एक हजार वर्षों तक संघर्ष की चेतावनी दी थी। उसका परिणाम रहा भारत-नेपाल वार्डर पर राष्ट्र विरोधी गतिविधियां बढ़ने लगीं। माओवादियों की गतिविधियां बढ़ने लगीं। हमने अपना कार्यक्षेत्र नेपाल बार्डर को बनाया। हिंदू युवा वाहिनी के लोग वहां सक्रिय हुए। परिणाम रहा कि उत्तर प्रदेश में माओवादी नहीं प्रवेश कर सके बल्कि बिहार में आने जाने लगे। माओवादियों की तरफ से नेपाल में थारू जनजाति के लोग भारतीय मूल के मधेशियों से लड़ रहे थे। हमने उन्हें रोकने का कार्य किया। उनके लिए विद्यालय खोला। उनके बच्चों को शिक्षा दीक्षा दी। आज हर थारू परिवार का एक सदस्य सरकारी नौकरी में है। हियुवा के लोगों ने बनटांगियों के बीच कार्य किया। 67 साल से उन्हेें कोई सुविधा नहीं मिल रही थी। उनके प्रयास से वन्य ग्रामों को मान्यता मिली। आज उन्हें सभी सरकारी सहायता मिल रही है।
0 हाल ही में एक टेप आया है, जिस पर बहस छिड़ी हुई है ?
वह टेप आठ से दस साल पुराना हो सकता है। एक कार्यक्रम में शामिल होने आजमगढ़ जा रहा था। उसी दौरान उनके काफिले पर हमला किया गया। उस दौरान उसी परिप्रेक्ष्य में कहा होगा।
0 इसे जारी करने का औचित्य क्या हो सकता है ?
यह तो वही बता सकता है, जिसने इन्हें जारी किया है। मेरे कार्य करने का अपना तरीका है उसी हिसाब से करता हूं।