गोरखपुर। सूख रही धान की फसल को बारिश से संजीवनी मिली है। पीले पड़ रहे पौधे हरे भरे हो गए हैं। लेकिन खर-पतवार अधिक उग जाने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि निराई के बाद ही किसान यूरिया का छिड़काव करें। वरना पौधे को सही खुराक नहीं मिल पाएगी और उनकी बढ़त प्रभावित होगी।
सावन में सूखे के बाद भादों में बादलों ने दरियादिली दिखाई है। चार दिनों में ही 136 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। हालांकि मानसूनी बारिश अभी भी औसत से 51 फीसदी कम हुई है। अब तक 719.6 की जगह 351.2 मिलीमीटर ही बारिश हुई है। सबसे कम बारिश कुशीनगर में 706.5 की जगह 156.8 मिलीमीटर हुई है। जो कि औसत से 78 फीसदी कम है। इसके अलावा देवरिया में 51 फीसदी, महराजगंज में 67 फीसदी कम बारिश हुई है।
जलवायु विज्ञानी कैलाश पांडेय के मुताबिक वायुमंडल में कम वायुदाब का सर्किल बना हुआ है। मौसम में नमी भी 90 प्रतिशत के आसपास है। जिसके कारण अगले 48 घंटों में नेपाल से सटे इलाकों में गरज के साथ बारिश हो सकती है और आसपास के जिलों में हल्की बारिश की संभावना है।
सप्ताह भर में अच्छी बारिश से धान की फसल को काफी फायदा पहुंचा है। पीले पड़ रहे पौधे हरे हो गए हैं। कहीं भी जलभराव से फसल को नुकसान होने की सूचना नहीं है। खर-पतवार बढ़ रहे हैं, किसान कीटनाशक के छिड़काव की जगह निराई करें और इसके बाद ही यूरिया का छिड़काव करें। दूसरी फसलों को भी बारिश से नुकसान नहीं है।
-जयप्रकाश, उपनिदेशक कृषि