गोरखपुर/कौड़ीराम। आज भले ही लड़कियां पुरुषों के बराबर या यह कहे कि उनके आगे निकल गई हो। लेकिन आज भी समाज में बेटों को ही महत्व दिया जाता है। गगहा के हरैया गांव की घटना इसका जीता जागता उदाहरण है। आठ साल तक परिवार के लोग किरन और उसकी बेटियों को घर की लक्ष्मी कहते थे। लेकिन विगत एक साल में घर का माहौल ऐसा बदला कि किरन को बेटियों के साथ खुदकुशी करनी पड़ी। देवर को लड़का होने के बाद परिवार के लोगों ने किरन और उसकी बेटियों को आए दिन ताने मारने लगे थे। पति के दूसरी शादी करने की धमकी देने पर मजबूर होकर उसने आत्मघाती कदम उठाकर जीवन ही समाप्त कर लिया।
तीन बेटियों के साथ किरन के आत्महत्या करने हरैया गांव में सनसनी फैल गई। बहू के आत्मघाती कदम से ससुर रामजन्म सबसे ज्यादा हैरान है। वहीं सुबह पति, सास और देवर भी घर में कोई विवाद न होने की बात कह रहे थे। लेकिन शुक्रवार की सुबह पुलिस ने बंद कमरे की तलाशी लिया तो पूरे मामला ही खुल गया। आलमारी से निकली डायरी में किरन ने पति और सास के उत्पीड़न की पूरी दास्तान लिख दी थी। आठ पन्नों के सुसाइड नोट की शुरूआत उसने आठ साल पहले के हालात का जिक्र करते हुए किया है। बड़ी बेटी पायल का जन्म होने के बाद परिवार में खुशी का माहौल था। इसके बाद दो और बेटियों का घर में जन्म हुआ। 2012 तक स्थिति ठीक रही इसी साल देवर शिवानंद की शादी झंगहा के बकसुड़ी गांव में हुई। एक साल बाद उसे बेटा हुआ जिसके बाद पति के साथ ही सास ताना देने लगे। सात माह पहले आनंद मस्कट से आया तो बेटे के लिए दूसरी शादी करने की धमकी देता था। सास सावित्री भी बड़े बेटे का कुल आगे न बढ़ा पाने का ताना देती थी। आहत किरन ने रोजाना के ताने से तंग आकर आत्महत्या के अलावा कोई और चारा न होने की बात डायरी में लिखी है। पुलिस किरन के मोबाइल को कब्जे में लेकर कॉल डिटेल का विवरण भी निकाल रही है।
गांव के बाहर बनवाया था मकान
रामजन्म का गांव के बाहर अपना मकान बनवाया था। रास्ते से आते - जाते कभी कभी लोग उसके पास आ जाते थे। घर में चल रही गतिविधियों से वह लोग अनजान थे। शिवानंद सफाई कर्मचारी है, वह भी घर में कम ही रहता था। भाभी की मौत से वह भी अवाक था कि यह कैसे हो गया।
तनिक भी नहीं था विवाद का एहसास : रामजन्म
मार्च 2010 में उत्तर प्रदेश पुलिस में दीवान के पद से सेवानिवृत्त रामजन्म बड़ी बहू और पोतियों की मौत पर आहत थे। सुसाइड नोट की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने घर में चल रहे विवाद का तनिक भी एहसास न होने की बात कही। उन्होंने बताया कि गांव में जाने से पहले पोतियों के साथ किरन कमरे में थी। मुझे लगा की वह लोग आराम कर रहे है इसलिए टोका नहीं था।