गोरखपुर। बिजली के बिल में गड़बड़ी का मामला कम होेने की बजाए बढ़ता ही जा रहा है। रीडिंग डिफेक्ट और मीटर की खामी की वजह से तकरीबन 16 हजार शहरी उपभोक्ताओं का बिल नहीं आ रहा है। वहीं बिल ठीक कराने के लिए उपभोक्ताओं को अधिकारियों के पास दौड़ लगानी पड़ रही है। दूसरी तरफ घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पावर कारपोरेशन ने सीलिंग की सीमा 800 यूनिट से बढ़ाकर आठ हजार यूनिट प्रतिमाह कर दिया है। पहले 800 यूनिट से अधिक खर्च होने पर रीडिंग डिफेक्टिव फॉल्ट (आरडीएफ) में चला जाता था।
बड़ी संख्या में शहरी उपभोक्ता बिल की गड़बड़ी की वजह से परेशान हैं। 31 मार्च तक ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या 16109 है। ज्यादातर लोगों की मीटर रीडिंग गलत निकाल दी गई है या मीटर में खराबी की वजह से उनका बिल आरडीएफ में चला गया है। आरडीएफ की श्रेणी में आने के बाद उपभोक्ता बिल काउंटर पर जमा नहीं कर सकता। अधिकारी आरडीएफ का निस्तारण करेंगे इसके बाद ही बिल जमा हो सकता। ऐसे में न सिर्फ उपभोक्ताओं को परेशान होना पड़ता है, बल्कि उन्हें जुर्माना भी भरना पड़ता है। बिजली विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक विद्युत वितरण खंड प्रथम में 3892, द्वितीय में 5727 तथा वितरण खंड तृतीय में 6484 उपभोक्ताओं के बिल सही नहीं आ रहे हैं।