गोरखपुर। एआरटीओ के खुदकुशी करने के बाद ड्राइवर ने वजह के बारे में जो आशंका जताई है पुलिस उससे इत्तेफाक नहीं रख रही। चेकिंग अभियान के दौरान बत्ती उतरने और ड्राइवर का चालान होने की घटना को पुलिस सामान्य कार्रवाई बता रही है। विभागीय लोगों के साथ-साथ पुलिस ड्राइवर से उनके पारिवारिक और विभागीय जिंदगी के बारे में जानकारी जुटाने में लगी है।
घटनास्थल पर मौजूद ड्राइवर इस्लाम ने बताया कि वह करीब दो साल से एआरटीओ महेंद्र तिवारी की प्राइवेट कार चला रहा है। डेढ़ साल पहले साहब अकबरपुर से ट्रांसफर होकर संतकबीरनगर आए थे। कुछ महीने होटल में रहने के बाद करीब आठ महीने पूर्व वह इस मकान में आए थे। शुक्रवार को उनके सीने में दर्द था जिसके बाद मकान मालिक के लड़के ने एमएम नर्सिंग होम रोड पर एक डॉक्टर को दिखाया था। सोमवार की शाम एआरटीओ साहब और विभाग के ही एक संविदा कर्मी साथ में गोरखपुर आ रहे थे। नौसड़ पुलिस चौकी पर सिपाहियों ने नीली बत्ती लगी प्राइवेट कार को रोक लिया। साहब और कर्मचारी चौकी के अंदर चले गए जबकि मैं गाड़ी केपास ही खड़ा था। बाद में पुलिस वालों ने नीली बत्ती उतरवाकर गाड़ी का चालान कर दिया। वहां से घर आने के बाद साहब काफी परेशान थे।
उन्होंने कहा कि जो बाबू साथ आया था वह क्या सोचेगा, संभव है कि वह जिले में जाकर सभी को बताएगा कि गाड़ी से बत्ती उतर गई है। ड्राइवर ने उन्हें आश्वस्त किया था कि वह बाबू को किसी को बताने से मना कर देगा। रात में मामूली खाना खाने के बाद साहब ने दूध भी नहीं पिया था। साहब ने दोपहर में भी कम ही खाना खाया था और कुछ अनमने से लग रहे थे। दोपहर में वह बेलीपार थाने पर गाड़ी के कागजात लेने चला गया। वहां से लौटकर घर आने पर दरवाजा बंद था। इस्लाम ने बताया कि एआरटीओ के एक बेटा, एक बेटी और पत्नी कानपुर स्थित घर पर रहते हैं। बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, साहब पिछले शुक्रवार को ही कानपुर से लौटकर आए थे।
इस संबंध में एसपी सिटी परेश पांडेय ने बताया कि परिवार के लोगों को घटना की सूचना दे दी गई है। वहां से लोग आ रहे हैं। विभागीय अधिकारियों, ड्राइवर और परिवार के लोगों से बातचीत के बाद ही आत्महत्या की वजह के बारे में कोई सही जानकारी हो सकती है।
दो अधिकारियों की गाड़ी का चालान हुआ था
नौसढ़ चौकी इंचार्ज हरि सिंह यादव ने बताया कि चेकिंग अभियान के दौरान सिपाहियों ने नीली बत्ती लगी दो गाड़ियां चौकी पर रोकी थीं। एक संतकबीरनगर के एआरटीओ महेंद्र तिवारी की थी जबकि दूसरी देवरिया के एक अधिकारी की थी। दोनों गाड़ियों के चालकों का चालान कर बत्ती उतरवाई गई थी। अधिकारियों को सम्मान के साथ भविष्य में ऐसा न करने का अनुरोध किया गया था।
कालेसर से निकल आए थे अधिकारी
आरटीओ और ट्रैफिक विभाग की टीम सोमवार को कालेसर में वाहनों की चेकिंग कर रही थी। हालांकि एआरटीओ महेंद्र तिवारी की गाड़ी उधर से ही आई थी, लेकिन तब तक शायद अधिकारियों की चेकिंग टीम वहां नहीं पहुंची थी। ट्रैफिक और आरटीओ विभाग के अधिकारियों ने वहां कोई चालान न होने की बात कही।