गोरखपुर। मेडिकल कॉलेज में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हाथों एमआरआई सेंटर का लोकार्पण तो करा दिया गया लेकिन लोकार्पित होने के तीसरे दिन शुक्रवार को भी यहां एमआरआई शुरू नहीं हो सके। वजह है एमआरआई सेंटर में मशीन का नहीं होना। एमआरआई मशीन की उपलब्धता तो दूर उसे खरीदने के लिए टेंडर प्रक्रिया ही अभी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में बिना मशीन वाले एमआरआई सेंटर के दरवाजे मरीजों के लिए खोल देने के सरकारी फैसले पर सवाल उठने लगे हैं।
बता दें कि लैपटॉप वितरण के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आठ अक्टूबर को गोरखपुर आए थे। इस दौरान उनसे कई योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास कराया गया। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एमआरआई सेंटर का लोकार्पण भी इनमें से एक था। यह वही एमआरआई सेंटर है, जिसे चालू करने की बुनियाद भी मुख्यमंत्री के पुराने दौरे के बीच पड़ी थी। पिछले साल 31 अक्टूबर को मुख्यमंत्री ने अपने गोरखपुर दौरे में मेडिकल कॉलेज को एमआरआई मशीन देने की घोषणा की थी। इसके लिए शासन की ओर से आठ करोड़ रुपये स्वीकृत भी हो गए। इसमें चार से पांच करोड़ रुपये मशीन के लिए, तीन लाख रुपये एमआरआई कक्ष के लिए और बाकी रकम कर्मचारियों और फर्नीचर पर खर्च करने का प्रारूप तय है। तीन माह पूर्व यह धनराशि मेडिकल कॉलेज को मिल गई। इसके बाद मेडिकल कॉलेज में एमआरआई कक्ष की स्थापना तो हो गई लेकिन इसके संचालन के लिए सबसे ज्यादा जरूरी एमआरआई मशीन का दूर-दूर तक पता नहीं है। यही नहीं मशीन खरीदने के लिए अभी टेंडर फाइनल करने का काम भी अधूरा है।
हैरानी की बात यह है कि आठ अक्टूबर के दौरे में मुख्यमंत्री के हाथों बिना मशीन वाले एमआरआई सेंटर का ही लोकार्पण करा दिया गया। लोकार्पण के प्रचार से एमआरआई के जरूरतमंद मरीज मेडिकल कॉलेज का रुख कर रहे हैं लेकिन हालात के आगे निराश लौटना और निजी स्तर पर महंगा एमआरआई करना उनकी मजबूरी बन गई है।
एमआरआई मशीन के लिए एक ही टेंडर आया था, जबकि नियमत: तीन टेंडर आने जरूरी हैं। कहा जा रहा है कि निविदा की जटिल शर्तों की वजह से टेंडर नहीं आ रहे हैं। तकनीकी कमेटी गठित कर टेंडर की शर्तों को आसान किया जाएगा। एमआरआई सेंटर को शीघ्र चालू करना प्राथमिकता है। इसके लिए गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं।
डॉ. केपी कुशवाहा, प्राचार्य, बीआरडी मेडिकल कॉलेज