गोरखपुर। बहुजन समाज पार्टी के विधायक राजेश त्रिपाठी ने विधानसभा में नियम 301 के तहत जिला पंचायत का मुद्दा उठाया व सवाल किए। उन्होंने कहा कि जिला पंचायत गोरखपुर में सदस्यों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 25 मार्च 2012 को 3 करोड़ 66 लाख के प्रस्ताव जिला पंचायत की बैठक में पारित हुए थे। जब सदन की कार्यवाही लिखी गई तो उसमें साढ़े पांच करोड़ के प्रस्ताव शामिल कर लिए गए। उन्होंने जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी का उल्लेख किया और कहा कि शासन का निर्देश है कि 500 से अधिक आबादी की बसावटों को ही प्रस्ताव में शामिल किया जाए। जबकि अपर मुख्य अधिकारी ने जिन प्रस्तावों को पास कराया है वह 250 की आबादी वाले हैं। इससे शासनादेश का भी उल्लंघन हुआ। इसके विरोध में जिला पंचायत सदस्यों ने धरना प्रदर्शन और अनशन किया तो प्रशासन सख्ती से पेश आया। कमिश्नर के हस्तक्षेप के बाद डीएम ने पूरे प्रकरण को संज्ञान में लिया और जांच की। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र पर हमला है। उन्होंने कहा कि हद तब हो गई जब कई महीने बाद एएमए का स्थानांतरण हुआ लेकिन दस दिन बाद वह पुन: उसी कुर्सी पर वे आ गए। उन्होंने सरकार से यह जानना चाहा कि एएमए को किस आधार पर वापस बुलाया गया। अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने सरकार से इस पर जवाब मांगा है। इस संबंध में अपर मुख्य अधिकारी आर एस यादव से बात की गई। उनका उत्तर था कि लोकतंत्र में हर कोई अपनी बात कहने को स्वतंत्र है। अधिक धन का प्रस्ताव पारित करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जब बीआरजीएफ में 2 करोड़ 79 लाख ही मिले तो साढ़े पांच करोड़ का प्रस्ताव देने का प्रश्न ही नहीं उठता।