गोरखपुर। पूर्वांचल में अभी भी किसान परंपरागत कृषि उद्योग पर ही निर्भर हैं। इसके चलते आर्थिक उन्नति नहीं हो पा रही है। जरूरत इस बात की है कि कृषि आधारित परंपरागत उद्योग को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाए। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट सिस्टम को भी दुरुस्त करना होगा, तभी पूर्वांचल के किसानों की उन्नति होगी। यह शोध निष्कर्ष है पूजा सिंह का। गोरखपुर विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग की शोध छात्रा ने पूर्वांचल के गाजीपुर, आजमगढ़, बलिया, वाराणसी, मऊ और जौनपुर जिलों की कृषि व्यवस्था पर शोध किया है।
भूगोल विभाग के अध्यक्ष प्रो. पीआर चौहान के निर्देशन में ‘कृषि आधारित उद्योग एवं ग्रामीण विकास’ विषय पर शोध के लिए पूजा ने गंगा और घाघरा दोआबा के निचले इलाकों वाले जिलों गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़, बलिया, वाराणसी और जौनपुर जिले का सर्वे किया। शोध के दौरान उन्होंने पाया कि दोआबा क्षेत्र में कृषि आधारित उद्योग और ग्रामीण विकास को और ज्यादा बेहतर करने की जरूरत है।
उन्होंने पाया कि कृषि क्षेत्र में औद्योगिक दृष्टिकोण का अभाव है। लोग परंपरागत रूप से फसली खेती पर ही निर्भर हैं जिसके चलते उद्योगों का विकास नहीं हो पाया है। दूसरे परिवहन और विपणन की सुविधा भी पर्याप्त नहीं है। कृषि आधारित उद्योगों का विकास पारिवारिक स्तर पर ही है। वह भी मध्यम और बड़े पैमाने पर नगरों के समीप वाले इलाकों में। हालांकि वहां भी कच्चे माल की सुलभता कम होने से वे भी बहुत विकसित नहीं हैं। दोआबा क्षेत्र में स्थापित कृषि आधारित उद्योग, कम पूंजी और परंपरागत तकनीक वाले हैं जिससे अपेक्षित रोजगार का सृजन नहीं हो पा रहा है। उन्होंने पाया कि वाराणसी के निकट गाजीपुर तक तथा आजमगढ़ से मऊ तक दो क्षेत्रों में ही कृषि आधारित उद्योगों का विकास और वितरण है। इन्हीं क्षेत्रों में नए कृषि उद्योग विकसित हो रहे हैं। ऐसे में इन्हीं क्षेत्रों में औद्योगिक विकेंद्रीकरण की प्रवृत्ति बढ़ रही है।