गोरखपुर। सरहद को प्रणाम कार्यक्रम के तहत ‘फिन्स’ (फोरम फार इंटिग्रेटेड नेशनल सिक्योरिटी) के आह्वान पर देश की 15 हजार किलोमीटर लंबी सीमा पर नवयुवकों की टोली ने 22 नवंबर को मानव शृंखला बनाई। इससे पूर्व सीमावर्ती इलाकों में रहने वालों को इन युवकों ने देश के आंतरिक और बाह्य खतरों के प्रति आगाह किया। साथ ही उनसे उनकी पीड़ा सुनी। इसी कड़ी में महराजगंज, कुशीनगर और सिद्धार्थनगर की 15 सीमा चौकियों पर 28 जिलों से आए 246 प्रतिभागियों ने क्षेत्रीय निवासियों और पेड़ पौधों को रक्षासूत्र बांध कर उनकी सुरक्षा का संकल्प लिया। यह जानकारी फिन्स के प्रांत प्रमुख सुधीर और ब्रिगेडियर केपीवी सिंह ने संवाददाताओं से बातचीत में दी। बताया कि यह कार्यक्रम देश भर में 19-22 नवंबर तक चला। शुक्रवार से युवाओं की टोली अपने-अपने घरों को लौटने लगी है।
सरस्वती विद्या मंदिर महिला पीजी कॉलेज में पत्रकारों से बातचीत में ब्रिगेडियर केपीवी सिंह ने कहा कि देश की त्रुटिपूर्ण नीति के चलते इंडो-नेपाल रिश्ता दरक रहा है। इन दोनों देशों के बीच हमारा रोटी-बेटी का रिश्ता था पर अब इसमें खटास आने लगी है। उन्होंने देश की सुरक्षा के लिए नेपाल से रिश्ता सुधारने की मांग की। उन्होंने बताया कि इन तीन दिनों में दस हजार से अधिक युवाओं ने देश के सीमावर्ती चौकियों पर जा कर न केवल वहां के निवासियों की समस्या जानी बल्कि उन्हें देशहित में काम करने का संकल्प भी दिलाया। बताया कि फिन्स का उद्देश्य नेतृत्व और जनता के बीच की सेतु बनकर देश की रक्षा करना है। उन्होंने कें द्र सरकार से विदेशी घुसपैठ पर अंकुश लगाने के लिए ठोस कदम उठाने, सीमावर्ती गांवों में ग्राम सुरक्षा समितियों का गठन करने, सैनिक, अर्द्ध सैनिक बल और कानून व्यवस्था से जुड़े लोगों को खतरों से निबटने के लिए आधुनिक एवं प्रभावी प्रशिक्षण देने तथा 14 नवंबर 1962 व 22 फरवरी 1964 के संसदीय संकल्प को स्मरण रख चीन और पाकिस्तान के कब्जे वाली एक-एक इंच जमीन वापस लेने की पहल करने की मांग की।