गोरखपुर। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने पर गीडा की सात फैक्ट्रियों को बंद करने करीब 29 लाख जुर्माना वसूलने का आदेश सुनाया है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस संबंध में कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
रामगढ़ताल, आमी नदी के प्रदूषण को लेकर मीरा शुक्ला और विश्वविजय सिंह की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी के न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल, न्यायमूर्ति रामकृष्ण और विशेषज्ञ डॉ. नागिन नंदा ने केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड को इस संबंध में कार्रवाई का निर्देश दिया। साथ जुर्माना वसूलने की जिम्मेदारी उत्तरप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दी है। एनजीटी की टीम ने आठ फरवरी को गीडा की सात औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण किया। इसमें विभिन्न मानकों का उल्लंघन पाया गया। इस आधार पर उनपर जुर्माने की रकम तय की गई है। साथ ही उत्तरप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश दिया है कि एनजीटी कमेटी की रिपोर्ट में जिन कमियों का उल्लेख है, उन्हें दूर होने के बाद ही इन फैक्ट्रियों को फिर से खोलने की अनुमति दी जाए।
इन फैक्ट्रियों को देना होगा जुर्माना
भारती रिसर्च एंड ब्रीडिंग फर्म - 2.90 लाख, मदरश्री डेयरी - 8.40 लाख, अलकेन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड - 4.25 लाख, बरनेत फार्मास्यूटिकल- 3.50 लाख, गोरखनाथ एग्रो इंडस्ट्रीज - 3.31 लाख, रॉयल सबेरा फूड्स प्राइवेट लिमिटेड - 3.56 लाख, संधु हेचरी - 2.85 लाख।
रामगढ़ताल से प्रदूषण दूर करने के लिए किए गए जरूरी उपाय
गोरखपुर। एनजीटी हाईपावर कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी की मुख्य बेंच ने माना है कि रामगढ़ताल के प्रदूषण को कम करने के लिए जरूरी उपाय किए गए हैं। कास्केड फव्वारा लगाया गया है। साथ ही कई म्यूजिकल फव्वारे भी लगाए गए हैं। इससे ताल में ऑक्सीजन के स्तर में बढ़ोतरी होगी।