तीन फोटो - दो टेराकोटा शिल्पकारों और एक कलाकृति बनाते शिल्पकार की तस्वीर
टेराकोटा शिल्पियों को मिट्टी मुफ्त मिलेगी
उद्योग विभाग ग्राम सभा या शिल्पकारों के नाम तालाब का पट्टा देने की तैयारी में जुटा
अप्रैल से जून तक क्षेत्र के तालाबों से निकाल सकेेंगे मिट्टी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। आने वाले समय में टेराकोटा शिल्पियों को मिट्टी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। सरकार इन शिल्पियों को तालाबों से निकलने वाली विशेष मिट्टी अप्रैल से जून तक मुफ्त में उपलब्ध कराएगी। उद्योग विभाग योजना को मूर्त रूप देने की तैयारी में जुट गया है।
गोरखपुर में टेराकोटा के तीन हजार से ज्यादा शिल्पकार हैं। पहले तालाब के पट्टे प्रबंधकों को आवंटित कर दिए जाते थे। शिल्पियों को मिट्टी के लिए अच्छी खासी रकम चुकानी पड़ती थी। मिट्टी का संकट भी बना रहता था।
मुश्किल है काबिस मिट्टी हासिल करना
टेराकोटा शिल्पकार रामप्रीत प्रजापति ने बताया कि टेराकोटा शिल्प बनाने के लिए इस्तेमाल में लाई जाने वाली मिट्टी खास होती है। तालाब की तलहटी से एक फीट तक मिट्टी हटाने के बाद मात्र तीन इंच तक ही हल्के लाल रंग की काबिस मिट्टी मिलती है। इसमें आम की छाल, कास्टिक सोडा आदि मिलाकर कलाकृति बनाई जाती है।
रॉयल्टी हटने के बाद टेराकोटा शिल्पियों को मिट्टी मुफ्त उपलब्ध हो सकेगी। गांवों के तालाबों को ग्रामसभा, ग्राम पंचायतों के नाम से पट्टा करने की तैयारी की जा रही है। उसके बाद शिल्पी वहां से आसानी से मिट्टी ले सकेंगे। - पूजा श्रीवास्तव, उपायुक्त उद्योग
टेराकोटा शिल्पी बोले
एक छोटी ट्राली मिट्टी के लिए 2500 से तीन हजार रुपये तक देने पड़ते हैं। मेहनत और लागत की तुलना में लाभ कम होता था। - विश्राम प्रजापति, टेराकोटा शिल्पकार
सरकार की ओर से दी गई सहूलियत से टेराकोटा कलाकृति बनाने वाले शिल्पियों की परेशानी काफी हद तक कम हो जाएगी। - आनंद प्रजापति, टेराकोटा शिल्पकार