गोरखपुर। अब ड्राइवर ट्रेन को फुल स्पीड से चला सकेंगे। उन्हें दो किलोमीटर पहले से ही सिग्नल सतर्क कर देगा। इससे जहां समय की बचत होगी वहीं हादसे की गुंजाइश भी न के बराबर रहेगी। यह संभव होगा रेलवे ट्रैक पर लगे डबल डिस्टेंट सिग्नल से, जिसे सीतापुर से लेकर छपरा तक लगाने की योजना को मूर्तरूप देने को पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। खास बात यह है कि नई तकनीक के भरोसे गोरखपुर से होकर राजधानी एक्सप्रेस चलाने का रास्ता भी साफ हो जाएगा।
पूर्वोत्तर रेलवे में लखनऊ-वाराणसी-छपरा रूट पर डबल डिस्टेंट सिग्नल लगाए जा चुके हैं। अब सीतापुर, गोंडा, गोरखपुर, सीवान के रास्ते छपरा जाने वाले ट्रैक पर यह सुविधा नहीं है। एक सिग्नल होने से ड्राइवर स्पीड को नियंत्रित कर चलाते हैं। इसके चलते ज्यादातर ट्रेनें अपनी फुल स्पीड पर नहीं चल पाती हैं। दो होम सिग्नल के सक्रिय होने से ड्राइवर पहले से ही सतर्क रहेंगे। एक-एक किलोमीटर की दूरी पर ये सिग्नल लगेंगे। पहला सिग्नल बताएगा कि आगे का रास्त क्लियर है व्यस्त। दूसरा सिग्नल आने वाले स्टेशन की जानकारी देगा। सिग्नल के मुताबिक ड्राइवर ट्रेन को संचालित कर सकेंगे।
130 किमी रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें
गोरखपुर। रेलवे ट्रैक पर डबल डिस्टेंट सिग्नल लगने से ट्रेनें 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौडे़ंगी। अभी अधिकतम स्पीड 110 से 115 किलोमीटर प्रति घंटा है। वह भी इस स्पीड से वैशाली एक्सप्रेस, नाहरलागुन एक्सप्रेस आदि गिनी चुनी ट्रेनें ही चल पाती हैं।
सीतापुर से छपरा तक डबल डिस्टेंट सिग्नल लगाने को बजट मंजूर है। इस दिशा में काम भी शुरू हो चुका है। संरक्षा की दृष्टि से यह बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा। वहीं ट्रेनों की स्पीड बढ़ जाएगी, जिससे समय पालन में भी सुधार होगा।
वीआर विप्लवी, मुख्य संरक्षा अधिकारी पूर्वोत्तर रेलवे