गोरखपुर। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के आह्वान पर शुरू हुई ट्रक ऑपरेटर्स की हड़ताल दूसरे दिन शनिवार को भी जारी रही। दो दिन की हड़ताल के दौरान पहले ही कच्चा माल लेकर निकल चुके ट्रक अपनी मंजिल तक पहुंच चुके हैं। आने वाले दिन में रोजमर्रा की वस्तुएं मसलन आलू, प्याज, दाल, फल आदि की आपूर्ति ठप रहने से आम जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
फल एवं सब्जी थोक व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शुक्ला का कहना है कि प्याज, नारियल, आलू, टमाटर आदि के ट्रकों को महेवा मंडी तक पहुंचने में दो दिन का समय लग जाता है। शनिवार को माल पहुंच गया। रविवार को मंडी बंद रहती है, लेकिन हड़ताल जारी रही तो सोमवार से संकट खड़ा हो सकता है। उधर ट्रांसपोर्ट नगर समेत ऑटो पार्ट्स आदि की दुकानों पर काम करने वाले मजदूरों का रोजगार तो छिन ही गया है, ऑटो पार्ट्स की बिक्री भी प्रभावित हो रही है।
जिले से रोजाना करीब चार हजार ट्रकों का संचालन होता है वहीं पांच सौ से अधिक ट्रक बाहर से जिले में आते हैं। दो दिनों की हड़ताल में करीब ढाई करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। गोरखपुर गुड्स ट्रांसर्पोट्स एसोसिएशन और गोरखपुर ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन ने शनिवार की सुबह अपने कार्यालय पर बैठक की। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन प्रभारी डीएम को सौंपते हुए जल्द सभी मांगे पूरी करने की अपील की। इस दौरान मोनू सिंह, मनीष सिंह, दीपक कुमार सिन्हा, धर्मेंद्र सिंह, अब्दुल रशीद, अशोक कपूर, संजीव सिंह, अखिलेश यादव, बबलू यादव, शत्रुधन यादव, आरके मिश्रा समेत कई ट्रक आपरेटर्स मौजूद रहे।
दूध-सिलेंडर वाली गाड़ियां रोकने की चेतावनी
गोरखपुर गुड्स ट्रांसपोर्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके तिवारी व धर्मेंद्र सिंह ने प्रभारी डीएम को ज्ञापन देने से पहले प्रेस क्लब में पत्रकारवार्ता की । इस दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार अगर ऐसे ही अड़ी रही तो दूध, सिलेंडर, ब्रेड आदि की जिन गाड़ियों को एसोसिएशन ने हड़ताल से बाहर रखा है उनके पहिए भी रोक दिए जाएंगे। ऐसे में रोजमर्रा के सामानों की कीमतें आसमान छूने लगेंगी जिसकी जिम्मेदार सरकार ही होगी।
शराब की गाड़ियां रोकने की अपील
गोरखपुर गुड्स ट्रांसपोर्ट्स एसोसिएशन के सदस्यों ने शनिवार को गीडा स्थित शराब फैक्ट्री आईजीएल पहुंचकर वहां ट्रकों के मालिकों व चालकों से हड़ताल में सहयोग करने की अपील करते हुए शराब का स्टॉक नहीं उठाने को कहा।
एसोसिएशन की प्रमुख मांग
- डीजल की कीमत में कमी, राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य मूल्य निर्धारण और त्रैमासिक संशोधन, टोल बैरियर से मुक्ति, तृतीय पक्ष बीमा प्रीमियम निर्धारण में पारदर्शिता, इसपर जीएसटी की छूट और कंप्रेहेंसिव पॉलिसी के माध्यम से एजेंटों को भुगतान किए जा रहे अतिरिक्त कमीशन पर रोक, ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर टीडीएस खत्म हो, ई-वे बिल से छूट।