संगोष्ठी में बोलते हृदय नारायण दीक्षित।
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हिंदी एक समृद्ध भाषा है। इसके विकास से ही राष्ट्र की उन्नति संभव है। हिंदी को राष्ट्रीय भाषा बनाने के लिए आजादी के पहले से ही सभी लोग एकमत और एकजुट थे, किंतु आजादी के बाद सत्ता मिली तो कांग्रेस की कथनी व करनी में फर्क आ गया और उसने हिंदी की उपेक्षा की। स्वयं महात्मा गांधी ने अपनी पुस्तक में कहा है कि मुझे हिंदी बोलने में परेशानी होती है, फिर भी मैं चाहूंगा कि हिंदी ही हमारी राष्ट्रभाषा हो।
ये बातें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की ओर महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज जंगल धूसड़ में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करने के बाद मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहीं। कहा कि आजादी के लिए संघर्ष के दौरान जवाहरलाल नेहरू ने भी कई बार कहा था कि हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा हो, किंतु बाद में संविधान निर्माण के दौरान वह अपनी बातों से मुकर गए।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि आज हिंदी का वर्चस्व देश के समूचे क्षेत्र में है। पहले जहां लोग हिंदी बोलने से कतराते थे, आज हिंदी भाषा से ही उनका विकास संभव हो सका है। हिंदी आत्मीय भाषा है, जो दिलों को आपस में जोड़ती है। अंग्रेजी की अपेक्षा हिंदी सरल व समृद्ध भाषा है जो स्पष्ट अर्थ प्रकट करती है।
उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. सदानंद गुप्त ने कहा कि संस्थान देश ही नहीं विदेशों में भी हिंदी के प्रचार-प्रसार के प्रति कटिबद्ध है। हिंदी आज तेजी से बढ़ रही है। कोई भी सरकार हिंदी के विकास यात्रा में अवरोधी नहीं हो सकती। लेकिन हिंदी को अपने विकास के आयाम बढ़ाने होंगे। इसे भारत के जन-जन की भाषा बनानी होगी। यह राष्ट्रीय कार्यशाला हिंदी के विकासात्मक प्रवृत्ति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।
इससे पहले प्राचार्य डॉ. प्रदीप राव ने मुख्य अतिथि को पुष्पगुच्छ व स्मृति चिह्न भेंट करके उनका स्वागत किया। संचालन डॉ. अविनाश प्रताप सिंह ने किया। इस दौरान डॉ. कन्हैया सिंह, सुबोध मिश्र आदि मौजूद रहे।