लार के गयागीर में जांच करने पहुंचे एसडीएम।
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लार। कस्बे के गयागीर वार्ड निवासी पल्लेदार पशुपति राजभर की बेटी खुशबू (7) और बेटे अजय (5) की कुपोषण से मौत की घटना को लेकर रविवार को एकाएक प्रशासनिक हलचल बढ़ गई। एसडीएम घनश्याम राजस्व कर्मचारियों के साथ दोपहर में पीड़ित परिवार तक पहुंचे। पशुपति को ढांढस बंधाने के साथ उसके घर 50 किलो गेहूं और 50 किलो चावल उपलब्ध कराए। साथ ही मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से आर्थिक मदद दिलाने के प्रति आश्वस्त भी किया। इसके अलावा डीएम सुजीत कुमार के निर्देश पर पहुंचे जिला विकास अधिकारी एसके पांडेय ने पशुपति से मिलकर बच्चों के बीमार होने से लेकर इलाज के तरीके और दम तोड़ने तक के पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। साथ ही ब्लॉक के एडीओ रामबचन राम को पशुपति का बैंक अकाउंट खुलवाने के निर्देश दिए। कहा कि परिवार वास्तव में गरीबी की जद में है। आर्थिक सहायता दिलाने के लिए रिपोर्ट डीएम को भेजी जाएगी।
एसडीएम ने बताया कि डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री के विवेकाधीन कोष से आर्थिक मदद की कोशिश भी की जाएगी। इस परिवार के प्रति सरकारी अनदेखी स्वीकारते हुए एसडीएम ने कहा कि अब अंत्योदय कार्ड बनवाने सहित अन्य सरकारी योजनाओं से हर वो सहायता पशुपति को सुनिश्चित की जाएगी, जिसके लिए वह नियमानुसार हकदार होंगे। वहीं डीएम सलेमपुर के एसडीएम ने जांच में पाया है कि दोनों बच्चे पीलिया से पीड़ित थे। पिता पशुपति को 50-50 किलो गेहूं-चावल उपलब्ध कराया गया है।
पोस्टमार्टम न होने पर उठे सवाल
देवरिया। लार में पल्लेदार पशुपति राजभर के बेटे और बेटी की कुपोषण से मौत के मामले में शवों का पोस्टमार्टम न होने पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप लग रहे हैं कि पोस्टमार्टम से कुपोषण की गंभीर वजह सामने आने के कारण प्रशासन इस कदम से बच रहा है।
सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामशंकर राजभर ने इसे भाजपा शासन और प्रशासन की असंवेदनशीलता का उदाहरण बताया है। उनका कहना है कि पोस्टमार्टम न कराके सरकार कुपोषण से मौत का सच छिपाना चाहती है। इससे पहले गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में तमाम बच्चों की मौत के मामले में भी सरकार का संवेदनहीन रवैया सामने आया था। सपा नेता ने पशुपति के कुपोषित बच्चों के इलाज के सरकारी तरीके की जांच की भी मांग की है।
लार के लोगों ने भी स्थानीय सीएचसी से लेकर देवरिया जिला अस्पताल तक पशुपति राजभर के बच्चों को उपचार देने की बजाय रेफर करने का रास्ता अपनाए जाने पर सवाल उठाया है। पशुपति के नजदीक रहने वालों का कहना है कि इलाज के तरीकों की जांच होनी चाहिए। मौजूद सुविधाओं का सत्यापन भी होना चाहिए, ताकि हर मरीजों को रेफर करने की बढ़ती प्रवृत्ति काबू की जा सके। पोस्टमार्टम के बाबत पूछने पर एसडीएम घनश्याम ने कहा कि परिवार ने पुलिस या प्रशासन को बिना जानकारी दिए बच्चों की अंत्येष्टि कर दी। बच्चों के पिता की तहरीर या अर्जी के बाद ही दफन शवों को निकालकर पोस्टमार्टम कराया जा सकता है। पिता की ओर से ऐसी कोई पहल नहीं है।