स्कूल में बंद छात्रा अपनी मां के साथ।
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शिक्षकों और स्कूल स्टाफ की लापरवाही से कक्षा आठ की एक छात्रा (14) की जान पर बन आई। परीक्षा के बाद सभी छात्रा को क्लास रूम में बंद कर घर चले गए। इधर, छात्रा के घर न पहुंचने से परेशान परिवार वाले काफी खोजबीन के बाद जब स्कूल पहुंचे तो वह क्लास रूम में बेंच पर हाथ में कॉपी लिए सोते मिली। कमरे का ताला तोड़कर छात्रा को बाहर निकाला गया। छह घंटे क्लास रूम में अकेलेपन की यातना झेलने वाली छात्रा बेहद सदमे में थी। भूख-प्यास से तड़पी छात्रा क्लास रूम से बाहर आते ही मां से लिपटकर रोने लगी। इससे नाराज गांव वालों ने दूसरे दिन सुबह स्कूल पहुंचकर जमकर हंगामा किया। कुछ स्थानीय लोगों ने समझा-बुझाकर उन्हें शांत कराया। बीएसए रामसागर पति त्रिपाठी ने घटना को गंभीर बताते हुए खंड शिक्षाधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
भटहट के महरी जूनियर हाईस्कूल में सोमवार को दूसरी पॉली में संस्कृत की परीक्षा थी। गांव के सुदर्शन की बेटी अनुपमा भी कक्षा आठ की 27 परीक्षार्थियों में शामिल थी। परीक्षा समाप्त होने के बाद अनुपमा को झपकी लग गई और वह बेंच पर ही सो गई जबकि अन्य विद्यार्थी घर चले गए। उधर, कमरे के बाहर बैठीं प्रभारी प्रिंसिपल प्रतिमा देवी और तीन महिला शिक्षकों न तो कॉपी का मिलान किया और न ही कमरे में देखने गईं। कक्षा छह के छात्र विनीत ने क्लास रूम में ताला लगाकर चाभी उन्हें दे दी। छुट्टी के एक घंटे बाद भी जब अनुपमा घर नहीं पहुंची तो परिवार वालों ने खोजबीन शुरू की। रात नौ बजे तक जब छात्रा का पता नहीं चला तो मां मैना देवी ने प्रभारी प्रिंसिपल को फोन कर बेटी के बारे में पूछताछ की। प्रिंसिपल ने बताया कि उन्होंने अनुपमा को स्कूल से बाहर जाते हुए नहीं देखा। उन्होंने उसके क्लास रूम में होने की शंका जाहिर की। इसके बाद स्कूल पहुंचे भाई अमित ने खिड़की के रास्ते जब अंदर देखा तो अनुपमा बेंच पर सोती मिली।
प्रिंसिपल को सूचना देने के बाद घरवालों ने क्लास रूम का ताला तोड़कर अनुपमा को बाहर निकाला। इस घटना की खबर गांव में फैलते ही नाराज ग्रामीण मंगलवार की सुबह स्कूल पहुंच गए। उन्होंने कमरे का ताला खोलने से रोक दिया और हंगामा शुरू कर दिया। ब्लॉक संसाधन केंद्र से मौके पर पहुंचे सह समन्वयक अभिमन्यु त्रिपाठी, रवि प्रकाश सिन्हा, आनंद मोहन और शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष बृजेंद्र राय ने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत कराया। प्रभारी प्रिंसिपल ने इसे मानवीय भूल बताते हुए गांव वालों से खेद प्रकट किया और दोबारा ऐसा न होने का भरोसा दिलाया।