प्रबोधिनी एकादशी की पूजा के लिए खरीदारी करतीं महिलाएं।
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चार माह से क्षीरसागर में शेषसैय्या पर सोए भगवान विष्णु इस बार भद्रा के बीच जागेंगे। इसके चलते प्रबोधिनी एकादशी से इस साल शहनाइयों की गूंज नहीं सुनाई पड़ सकेगी। ग्रह-नक्षत्रों की चाल के चलते इस बार लक्ष्मीपति के जागृत होने के 15 दिन बाद 16 नवंबर से विवाह के मुहूर्त बन रहे हैं।
पंडित प्रकाश नरायण पांडेय के मुताबिक मंगलवार को सूर्योदय से ही एकादशी तिथि का मान है, लेकिन इसके साथ भद्रा भी है। भद्रा के समय भगवान का उठना विचित्र संयोग है। इसका प्रभाव जीवों पर अवश्य पड़ेगा। इसलिए हम जीवों को भद्रा काल में पूजा-पाठ, दान परम आवश्यक है। पंडित शरद चंद्र मिश्र का कहना है कि देवोत्थान एकादशी यानी प्रबोधिनी एकादशी पर इस बार दोपहर 3:11 बजे तक भद्रा का मान है। इसलिए इसके बाद ही पूजन इत्यादि श्रेयष्कर होगा। तुलसी विवाह का आयोजन भी इसके बाद ही करना उचित होगा। पंडित नरेंद्र उपाध्याय का मानना है कि भले ही सूर्य की स्थिति प्रबोधिनी एकादशी पर नीच की हो, लेकिन अन्य ग्रहों की स्थितियों में सुधार हो रहा है। इसके चलते लोगों को शुभ फल मिलेंगे। शनि और गुरु पहले से अच्छी स्थिति में आ रहे हैं। जनमानस पर इसका शुभ प्रभाव देखने को मिलेगा। इस दिन दान, पुण्य, पूजा इत्यादि का विशेष फल मिलता है। ऐसे में लोगों को मन से भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए।
16 से गूंजेेगी शहनाई
इस बार सूर्य और गुरु की नीच की स्थिति के चलते प्रबोधिनी एकादशी के साथ मांगलिक कार्य नहीं शुरू होंगे। पंडित नरेंद्र उपाध्याय और पंडित शरद चंद्र मिश्र के मुताबिक लगन मुहूर्त 16 नवंबर से बन रहे हैं। इस तिथि से ही शादी-विवाह के आयोजन होंगे।
बाजार में खूब बिका गन्ना
प्रबोधिनी एकादशी पर उपवास में गन्ने के सेवन की मान्यता है। इसके लिए सोमवार को बाजार में जगह-जगह गन्ने की दुकान सजी रही। लोगों ने गन्ने, मूंगफली, शकरकंद आदि की खरीदारी की। कई लोग देहात क्षेत्रों से भी गन्ने लेकर आते नजर आए।