गोरखपुर।
आर्यनगर रामलीला समिति के तत्वावधान में मानसरोवर मैदान में जारी रामलीला के नौवें दिन भगवान के विलाप से लेकर सुग्रीव के साथ मित्रता तक का मंचन हुआ।
रामलीला की शुरुआत सीताहरण के बाद प्रभु श्रीराम के कुटिया लौटने के दृश्य से हुई। वहां सीता को न पाकर भगवान राम विलाप करने लगे। इसके बाद वह सीता को खोजने निकले। मार्ग में गिद्धराज जटायु व कबन्ध का उद्धार करते हुए सबरी आश्रम पहुंचे। वहां सबरी के जूठे बैर खाकर प्रभु ने छुआछूत के खिलाफ संदेश दिया। इसके बाद भगवान ने ऋ ष्यमूक पर्वत की ओर प्रस्थान किया। उन्हें आता हुआ देख सुग्रीव को चिंता हुई। उन्होंने हनुमान को पता लगाने भेजा। भगवान राम का परिचय पाकर हनुमान ब्राह्मण भेष त्यागकर अपने मूल रूप में आ गए। वह प्रभु को लेकर सुग्रीव के पास पहुंचे। वहां राम व सुग्रीव की मित्रता हुई।
बर्डघाट में हुई लंका दहन की लीला
गोरखपुर। बर्डघाट की रामलीला में बुधवार को लंका दहन का मंचन हुआ। शुरुआत हनुमान के समुद्र पार जाने की तैयारी के दृश्य से हुई। समुद्र तट पर पशोपेश में बैठे बजरंग बली को जामवंत उनका बल याद दिलाते हैं। इसके बाद हनुमान छलांग लगाते हैं और लंकनी को मारकर लंका के मुख्य द्वार से नगर में प्रवेश करते हैं। विभीषण से मुलाकात होती है, जो उन्हें सीता के अशोक वाटिका में होने की जानकारी देते हैं। सीता को प्रभु की अंगूठी भेंटकर उन्हें शीघ्र श्रीराम के आने का संदेश देते हैं। भूख लगने पर वह वाटिका उजाड़ देते हैं। इस पर मेघनाथ उन्हें बंदी बनाकर दरबार में ले जाता है। वहां रावण के आदेश पर उनकी पूंछ में आग लगा दी जाती है। इसी आग से लंका राख हो जाती है।
आज निकलेगी वनयात्रा
रामलीला समिति गांधी मैदान, बहरामपुर की ओर से गुरुवार को शाम छह बजे बहरामपुर पुरानी चुंगी से श्रीराम वनयात्रा का जुलूस निकाला जाएगा। इलाहीबाग, नरसिंहपुर, निजामपुर, घासीकटरा, जाफराबाजार, अंधियारीबाग, सूरजकुंड, तिवारीपुर होते हुए बहरामपुर चुंगी लौटकर समाप्त होगा। यह जानकारी समिति के मीडिया प्रभारी पंकज खरे ने दी।