गोरखपुर।
जीडीए उपाध्यक्ष वैभव श्रीवास्तव की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। इधर मानबेला की जमीन के अधिग्रहण का मामला जहां फिर उलझ गया है वहीं राप्तीनगर विस्तार आवासीय योजना को लेकर अब हाईकोर्ट ने सख्ती कर दी है। अवमानना के मामले में हाईकोर्ट ने 14 सितंबर को उपाध्यक्ष को व्यक्तिगत तौर पर कोर्ट में तलब किया है।
मानबेला की ही करीब 57 एकड़ जमीन पर प्राधिकरण ने एक दशक पहले राप्तीनगर विस्तार आवासीय योजना शुरू की थी। करीब नौ सौ लोगों को प्राधिकरण ने प्लाट आवंटित किए थे। इनमें से 250 से अधिक आवंटियों ने रजिस्ट्री भी करा ली थी मगर इसी बीच मुआवजे की राशि को लेकर मानबेला के किसानों ने आंदोलन शुरू कर दिया। कुछ किसान कोर्ट भी चले गए। इससे इन आवंटियों को कब्जा नहीं मिल सका। पिछले करीब सात वर्षों से आवंटी कमिश्नर, डीएम से लेकर प्राधिकरण के चक्कर लगा रहे हैं। कुछ आवंटी कोर्ट की शरण में भी चले गए। कोर्ट ने छह महीने में आवंटियों को कब्जा दिलाने का आदेश दिया था। तय समय के भीतर भी जब प्राधिकरण ने कोई कार्रवाई नहीं की तो आवंटियों ने हाईकोर्ट में अवमानना का केस दाखिल कर दिया था।
आवंटियों के अधिवक्ता रंजीत अस्थाना ने फोन पर ‘अमर उजाला’ को बताया कि अवमानना के मामले में हाईकोर्ट ने 14 सितंबर को उपाध्यक्ष वैभव श्रीवास्तव को व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होकर आवंटियों को कब्जा दिलाने के मामले में अब तक हुई कार्रवाई के बारे में रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। अब ऐसे में प्राधिकरण के सामने दोहरा संकट खड़ा हो गया है। मानबेला का मामला तो फंस ही गया है, राप्तीनगर के आवंटियों को लेकर कोर्ट की सख्ती भी शुरू हो गई है।