गोरखपुर।
मेयर की अध्यक्षता में गठित नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल आज खत्म हो जाएगा। इसके साथ ही मेयर और मनोनीत 10 पार्षदों समेत 80 पार्षद के अब ‘पूर्व’ हो जाएंगे। इन सभी के सारे अधिकार खत्म हो जाएंगे और नगर निगम की कमान नगर आयुक्त के हाथ में चली जाएगी।
सात अगस्त 2012 को मेयर डॉ. सत्या पांडेय की अध्यक्षता में नगर निगम बोर्ड की पहली बैठक हुई थी। शासन ने इसे ही नगर निगम बोर्ड के कार्यकाल की अंतिम तारीख तय की है। लिहाजा इस सोमवार को यह कार्यकाल खत्म हो जाएगा। मेयर समेत सभी पार्षद अपने इलाकों में नाली और खड़ंजा को उपलब्धि के तौर पर दिखा रहे हैं, लेकिन डॉ. सत्या पांडेय के नेतृत्व में नगर निगम का इस कार्यकाल को लोग औसत बता रहे हैं। हालांकि बोर्ड की विभिन्न बैठकों में कई ऐसे निर्णय लिए गए, जिन्हें पूरा कर लिया जाता तो मेयर से लेकर पार्षद तक इसे गर्व के साथ गिना सकते। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, नगर निगम स्थित पोखरे में म्यूजिकल फाउंटेन, नगर निगम सदन, विद्युत शवदाह गृह, पशुबाड़े का निर्माण, छुट्टा पशुओं के हमले में घायल को या मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने समेत कई फैसले फाइलों में घूमते रह गए। इन सारी उम्मीदों के ‘टूटने’ के साथ रविवार को नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल खत्म हो गया।