टीपी शाही
गोरखपुर।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देेने के बाद सदर संसदीय क्षेत्र में उपचुनाव होगा। इसके पहले भी इस क्षेत्र में तत्कालीन सांसद महंत दिग्विजयनाथ के निधन के बाद 1970 में उप चुनाव हुआ था, जिसमें महंत अवेद्यनाथ ने कांग्रेस प्रत्याशी को हराकर चुनाव जीता था। इस बार कौन मंदिर की तरफ से प्रत्याशी होगा अभी सब पर्दे के पीछे है। आजादी के 47 साल बाद गोरखपुर संसदीय क्षेत्र में दूसरी बार उप चुनाव होगा।
पहली बार तत्कालीन सांसद महंत दिग्विजयनाथ का निधन होने के कारण उप चुनाव हुआ था। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की पृष्ठभूमि एक कट्टरवादी हिंदू नेता की थी। महात्मा गांधी की हत्या के बाद 19 महीने तक उन्हें नजरबंद किया गया था। दिग्विजयनाथ गोरखपुर संसदीय सीट से लगातार चुनाव लड़ते रहे पर पहली बार 1967 में हिंदू महासभा के प्रत्याशी के रूप में संसद पहुंच सके। 28 सितम्बर 1969 को दिग्विजयनाथ का निधन हो गया। इसके बाद उपचुनाव का एलान हुआ। तब गोरक्ष पीठ के महंत अवेद्यनाथ थे। वह गोरखपुर की मानीराम विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीते थे लेकिन दिग्विजयनाथ के उत्तराधिकारी के रूप में अवेद्यनाथ ने ही लोकसभा का उपचुनाव लड़ा। हिंदू महासभा के प्रत्याशी के रूप में उन्होंने कांग्रेस के भृगुनाथ चतुर्वेदी को हरा दिया। सांसद बनें लेकिन यह सिलसिला ज्यादा समय तक नहीं चल सका। इसके बाद हुए आम चुनाव में गोरखपुर संसदीय सीट गोरक्ष पीठ के हाथ से निकल गई। 1989 के आम चुनाव में यह सीट फिर गोरक्ष पीठ के पास आई और अजेय बनकर रह गई। अब उपराष्ट्रपति के चुनाव के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ के जल्द ही इस्तीफा देने की खबरों के बीच सत्ता और विपक्ष दोनो खेमे में उप चुनाव की हलचल शुरू हो गई है। मतदाता सूची में नाम बढ़वाने से लेकर बूथ कमेटियों को दुरूस्त करने की कवायद चल रही है।