संतकबीरनगर/बाघनगर । दुधारा क्षेत्र में रविवार को सरयू नहर में मां- बेटे का शव मिला। एक किलोमीटर के दायरे में अलग-अलग जगहों पर शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शवों को कब्जे में ले लिया। बस्ती जिले के रुधौली क्षेत्र के नगहरा गांव निवासी वृद्ध शिवप्रसाद ने शवों की पहचान अपनी बहू गीता देवी(32) पत्नी रामकुमार और पोते अंश चार वर्ष के रूप में की।
दुधारा क्षेत्र के मीरपुर धरुई पुल के पास सरयू नहर में रविवार दोपहर डेढ़ बजे के करीब पहले मां की लाश उतराती दिखी, वहां से करीब एक किलोमीटर दूर उसरा शहीद गांव के पास मासूम की। धीरे-धीरे लोग वहां जुटने लगे और फिर पुलिस पहुंची। कुछ लोगों द्वारा मां- बेटे के रुधौली के नगहरा गांव के निवासी होने की जानकारी पुलिस को दी। सूचना पर पहुंचे नगहरा गांव निवासी शिवप्रसाद (62) शवों को देख कर सहम गए। उन्होंने शवों की पहचान अपने पोते और बहू के रूप में की। उन्होंने बताया कि पांच साल पहले बड़ा बेटा रामकुमार अपने मझले भाई राम गोविंद की पत्नी ममता को साथ लेकर अहमदाबाद चला गया था। इससे गीता नाराज थी। करीब एक साल पहले रामकुमार गांव आया था। जिसके बाद गीता से पोता अंश पैदा हुआ था। इधर, 26 जून में मझले बेटे रामगोविंद ने भी दूसरी शादी कर ली और दिल्ली में परिवार के साथ रहता है। रविवार सुबह नौ बजे के करीब बहू गीता पोते अंश को साथ लेकर घर से निकली थी। उस दौरान घर पर छोटे बेटे राजेंद्र की पत्नी, सास और गीता के तीन बच्चे मौजूद थे। घर के लोगों को लगा कि गीता पोते के साथ किसी काम से बाहर जा रही है। बाद में पता चला कि बहू और पोते की लाश सरयू नहर में मिली है। एसओ संजय सिंह ने बताया कि पूछताछ में यही पता चला कि मृतका के पति अपने मझले भाई की पत्नी को साथ लेकर अहमदाबाद में रहता है। पति के जरिए पत्नी और बच्चों का देखभाल नहीं किए जाने से गीता परेशान रहती थी। उसी वजह से उसने छोटे बेटे अंशू के साथ आत्महत्या कर ली।
पति की बेवफाई से परेशान थी गीता
बाघनगर। पति की बेवफाई से जिंदगी से आजिज आ चुकी गीता ने आखिकार रविवार को मासूम बेटे अंश के साथ नहर में कूद कर मौत को गले लगा लिया। बहू और मासूम पोते का शव देखकर बूढ़े शिवप्रसाद की आंखें भर आई। बेटे की करतूत को कोसते हुए ऐसा दिन देखने की बात बताते हुए वह फफक पडे़।
नगहरा गांव निवासी शिवप्रसाद के तीन बेटे हैं। बड़े बेटे रामकुमार की शादी लगभग 14 साल पहले बखिरा क्षेत्र के मुड़िला गांव निवासी गीता से हुई थी। चार साल पहले मझले बेटे राम गोविंद की शादी हुई। शादी के कुछ दिन बाद बड़ा बेटा मझले की पत्नी ममता को लेकर अहमदाबाद(गुजरात) चला गया। तब से एक बार घर आया था। रामकुमार की पत्नी गीता से शनि कुमार 12 साल, सपना नौ साल, नयना सात साल और सबसे छोटा अंश चार साल था। गीता पति की भयहू को लेकर साथ रहने और शादी कर लेने की वजह से बहुत उलझन में जिंदगी गुजार रही थी। जून में मझले बेटे रामगोविंद ने भी दूसरी शादी कर ली। उसके बाद गीता को लगा कि अब उसकी जिंदगी में सिर्फ दुख ही दुख है। पति की बेवफाई की वजह से ही गीता अपने मासूम बेटे अंश के साथ नहर में डूब कर जान दे दी। मां की मौत उसके तीन अन्य बच्चे अनाथ हो गए। शिव प्रसाद ने बताया कि मासूम बच्चों के पाल पोषण का बोझ अब बूढ़ापे में आ पड़ा है। रामकुमार की दूसरी शादी से परिवार बर्बाद हो गया। नगहरा गांव के ग्राम प्रधान राम सुख ने बताया कि गीता देवी बच्चों को लेकर बहुत परेशान रहती थी। मानसिक उलझन से मौत को गले लगा लिया। गोविंद इस समय दिल्ली में रहता है। घर पर इस समय सास ससुर, देवर राजेंद्र और उसकी पत्नी के अलावा गीता देवी के तीनों बच्चे मौजूद हैं।