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रेरा में रजिस्ट्रेशन कराने वालों का सत्यापन कराएगा जीडीए

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गोरखपुर। रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) में रजिस्ट्रेशन कराने वाले बिल्डर्स के प्रोजेक्ट का जीडीए सत्यापन कराएगा। हालांकि रेरा की पूरी मानीटरिंग लखनऊ से की जा रही है मगर इसमें वे ही बिल्डर्स रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे जिन्होंने निर्माण कार्य पूरा होने के बाद कंपलीशन (पूर्णता) सर्टिफिकेट जमा कर दिया हो।
कंपलीशन सर्टिफिकेट जमा करने के बाद प्राधिकरण यह जांच करता है कि निर्माण कार्य मानचित्र के मुताबिक हुआ है या नहीं। ऐसे में प्राधिकरण की गर्दन न फंसे, इसलिए उसने इन सभी बिल्डरों के प्रोजेक्ट का सत्यापन करने का निर्णय किया है। सत्यापन कार्य बुधवार से शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि जीडीए के अफसर अभी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। उत्तर प्रदेश में रेरा की वेबसाइट क रीब सप्ताह भर पहले ही लांच की गई थी। इस वेबसाइट पर ही सभी बिल्डरों को रजिस्ट्रेशन कराना था। 31 जुलाई तो रजिस्ट्रेशन का आखिरी दिन था। सारी जानकारी एकत्रित करने के बाद सोमवार की देर शाम तक जीडीए समेत शहर के करीब 10 बिल्डरों ने भी अपना रजिस्ट्रेशन कराया।
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बढ़ेगी जवाबदेही, बंद होगी मनमानी
गोरखपुर। रेरा लागू होने के बाद अब बिल्डरों की मनमानी बंद होने के साथ ही आवंटियों के प्रति उनकी जवाबदेही बढ़ जाएगी। तय समय पर प्रोजेक्ट पूरा करने के साथ ही पूर्व में तय प्रोजेक्ट में किसी तरह क ा बदलाव करने के लिए भी उन्हें आवंटियों की रजामंदी लेनी पड़ेगी। पांच साल पहले से संचालित योजनाएं भी रेरा की शर्तों के अधीन होंगी। विशेष परिस्थितियों मसलन युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, चक्रवात, भूकंप आदि की दशा में ही कोई बिल्डर प्रोजेक्ट का एक्सटेंशन करा सकेगा। बिल्डर को अपने प्रोजेक्ट के प्लान में कोई बड़ा बदलाव करने के लिए उसे दो तिहाई खरीदारों से अनुमति लेनी पड़ेगी। इसके बाद ही वह कोई बदलाव कर सकेगा। यही नहीं, संशोधित प्लान भी रेरा की वेबसाइट पर अपलोड करना होगा।
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कंपलीशन सर्टिफिकेट देने के बाद ही रेरा के तहत कोई रजिस्ट्रेशन करा सकेगा। प्राधिकरण ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है। रेरा की मानीटरिंग लखनऊ से हो रही है। अगर किसी बिल्डर्स के प्रोजेक्ट के सत्यापन या जांच का निर्देश मिलेगा तो प्राधिकरण उसे कराएगा।
- वैभव श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष, जीडीए
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