गोरखपुर। गंगा के प्रदूषण में राप्ती नदी भी कारण बन रही है। इस सहायक नदी से हर रोज कई टन कचरा और दूषित पानी गंगा में पहुंच रहा है। वहीं इस क्षेत्र की एक और नदी रोहिन का भी यही हाल है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा बैठक के दौरान जिम्मेदार विभागों को नमामि गंगे योजना के तहत गंगा में गिरने वाली इन नदियों में प्रदूषण रोकने और उसके लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि शहर के जिन नालों का दूषित पानी राप्ती और रोहिन में गिरता है, उनकी सफाई के लिए 2015 में ही करीब 360 करोड़ की लागत से दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित करने की योजना तैयार की गई थी। शासन स्तर से इस मद में अभी तक फंड स्वीकृत नहीं किया गया है। राप्ती में गिरने वाले नालों को के पानी के ट्रीटमेंट के लिए 55 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट महेवा और रोहिन में गिरने वाले नालों के पानी के ट्रीटमेंट के लिए 26 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नेता जी सुभाष चंद्र बोस नगर में लगाने की योजना तैयार की गई है।
राप्ती में मिलने वाले नाले
डोमिनगढ़ नाला, बहरामपुर नाला, इलाहीबाग नाला, मिर्जापुर नाला, घसियारी नाला, बसंतपुर नाला, ट्रांसपोर्ट नगर नाला, कटनिया नाला, महेवा नाला
रोहिन नदी में गिरने वाले नाले
बसियाडीह नाला, नेताजी सुभाष चंद्र बोस नगर कॉलोनी नाला, स्टेपिंग स्टोन स्कूल नाला, ग्रीन सिटी फेज-2 नाला, बरगदवा गांव जालान नाला, महेसरा नाला, मोहरीपुर नाला
एनजीटी ने भी आमी के प्रदूषण पर जताई है नाराजगी
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने अभी हाल में ही आमी के पानी से गंगा के प्रदूषित होने पर नाराजगी जताई थी। एनजीटी ने प्रदेश के मुख्य सचिव को कमेटी गठित कर योजना का खाका प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। दरअसल आमी कौड़ीराम के सोहगौरा के पास राप्ती में मिलती है। राप्ती बड़हलगंज में घाघरा में मिल जाती है और घाघरा बलिया में गंगा में मिलती है। इस तरह से आमी नदी परोक्ष रूप से गंगा में मिल जाती है।