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जीडीए ने की वेट लैंड में आने वाली संपतियों की मार्किंग

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गोरखपुर। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) समेत तीन अन्य विभागों ने शनिवार को रामगढ़ताल के किनारे 50 मीटर के दायरे में प्रस्तावित वेट लैंड में आने वाली अपनी-अपनी संपत्तियों की मार्किंग की। इनमें सिंचाई विभाग, जल निगम और वन विभाग शामिल हैं।
बता दें कि एनजीटी ने रामगढ़ताल के कि नारे 50 मीटर के दायरे की जमीन को वेट लैंड घोषित करने के साथ ही वहां किसी भी तरह के निर्माण पर रोक लगाने का निर्देश दे रखा है। इस मामले में 15 सितंबर को अगली सुनवाई होनी है। इसके पहले ही सरकार रामगढ़ताल के बंधे से 50 मीटर दायरे की जमीन को वेट लैंड घोषित कर देना चाहती है। ऐसा होने पर सर्वाधिक नुकसान जीडीए को होने की आशंका है। प्राधिकरण ने यह समस्या डीएम से भी साझा की थी, जिसपर उन्होंने अपनी सभी योजनाओं को चिह्नित कर रिपोर्ट तैयार कर नोडल एजेंसी वन विभाग को उपलब्ध कराने को कहा था। वन विभाग दिल्ली स्थित वेट लैंड एथॉरिटी को यह रिपोर्ट भेजेगा, जिसके बाद पूर्व में स्वीकृत विभिन्न विभागों की योजनाओं को वेट लैंड के दायरे से बाहर कर दिया जाएगा। इसी क्रम में जीडीए के अफसरों ने मानचित्र के साथ रामगढ़ताल बंधे से 50 मीटर के दायरे में आने वाली सभी योजनाओं को लेकर सर्वे किया।
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जीडीए के चीफ इंजीनियर संजय सिंह ने बताया कि वेट लैंड के लिए तय दायरे के भीतर प्राधिकरण का होटल लोटस, चंपा देवी पार्क की बाउंड्री, प्रेक्षागृह, सर्किट हाउस के पास प्रस्तावित नुमाइश ग्राउंड तथा जल निगम का वाटर स्पोर्ट्स योजना आ रही है। इसी तरह वन विभाग का चिड़िया घर की बाउंड्री भी वेट लैंड की जद में आ रही है। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं की स्वीकृति पहले ही हो चुकी है, लिहाजा इस पर वेट लैंड की शर्तों का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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बन चुके मकानों को नुकसान नहीं, नए पर रोक
एनजीटी के आदेश पर अगर सरकार रामगढ़ताल के 50 मीटर के दायरे को वेट लैंड घोषित करती है तो इस दायरे में पहले से बन चुके मकान आदि को कोई नुकसान नहीं होगा, मगर अब वहां की जमीनों पर नए निर्माण नहीं हो सकेंगे। बता दें कि एनजीटी का यह आदेश आते ही रामगढ़ताल किनारे मकान बनवाकर रह रहे सैकड़ों लोगों के हाथ-पांव फूल गए थे कि उनका आशियाना न उजड़ जाए। जीडीए के चीफ इंजीनियर संजय सिंह का कहना है कि वेट लैंड को लेकर गजट होने के बाद संबंधित जमीन पर नए निर्माण नहीं कराए जा सकेंगे।
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