गोरखपुर। शहरी क्षेत्र की सफाई एजेंसियों को काली सूची में डालने के नगर निगम के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। साथ ही एजेंसियों का पक्ष सुनने, फिर नए सिरे से फैसला करने का आदेश दिया है। हिंदुस्तान सिक्योरिटी कंपनी व अन्य को गोरखपुर के 70 वार्डों की सफाई का ठेका मिला था लेकिन चार फरवरी 2019 को अनुबंध रद करके काली सूची में डाल दिया। नगर निगम की तरफ से कहा गया कि अब कूड़ा एकत्रित करने वाले सफाई कर्मियों से काम नहीं लिया जाएगा। निगम प्रबंधन के इस फैसले को सफाई एजेंसी ने हाईकोर्ट ने चुनौती दी थी।
दलील दी कि नियम और शर्तों के हिसाब से काम किया गया, फिर भी अनुबंध रद करके काली सूची में डाल दिया। इस मामले में एजेंसियों का पक्ष भी नहीं लिया गया। इस मामले की सुनवाई 14 मार्च को न्यायाधीश अभिनव उपाध्याय और न्यायाधीश जयंत बनर्जी की पीठ में हुई। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद खंडपीठ ने नगर निगम का आदेश खारिज कर दिया। अब आदेश का ब्योरा हाईकोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया है। इस समय शहर के 70 वार्डों में करीब 2400 सफाई कर्मचारी काम कर रहे हैं। रोजाना 600 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है।
सरकारी एजेंसी को ज्यादा मुनाफा पर दिया काम
निजी सफाई एजेंसियों को काली सूची में डालने के बाद शहरी आजीविका केंद्र (सीएलसी) को 3 फीसदी ज्यादा मुनाफा पर काम दिया गया है।
काली सूची में डाले जाने के बाद निजी एजेंसियों ने हाईकोर्ट में जो शपथ पत्र दाखिल किया था, उसके मुताबिक निजी एजेंसियों को 0.01 प्रतिशत मुनाफे पर काम दिया गया था। तबप्रति सफाई कर्मी को रोजाना 256 रुपये का भुगतान किया जाता था। अब सरकारी एजेंसी सीएलसी के हर सफाई कर्मी को रोजाना 296 रुपये मिलते हैं। इसका मतलब है कि हर सफाई कर्मचारी को 40 रुपये अतिरिक्त भुगतान किया जा रहा है। पहले एक करोड़ रुपये पर जो मुनाफा 1000 रुपये था, वह अब बढ़कर तीन लाख रुपये हो गया है।
सफाई के साथ शुरू हुआ था विवाद
अगस्त 2018 में शहर की सफाई का जिम्मा हिंदुस्तान सिक्योरिटी कंपनी और विशाल प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था, लेकिन दोनों कंपनियां शुरू से ही विवादों में रहीं। काफी समय तक कंपनी की ओर से निर्धारित सफाई कर्मचारियों को उपलब्ध नहीं कराया जा सका। कई वार्डों में सफाई हुई लेकिन कर्मचारियोें के मानदेय का भुगतान नहीं हुआ। इस पर धरना प्रदर्शन और हंगामा भी हुआ। नगर निगम कार्यकारिणी और बोर्ड में पार्षदों ने इन एजेंसियों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। बाद में प्रभारी नगर आयुक्त एवं जिलाधिकारी के. विजयेंद्र पांडियन ने सफाई एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई कर दी।
हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी है। नगर निगम की तरफ से जल्द ही शपथ पत्र दाखिल करके पक्ष रखा जाएगा।
डीके सिन्हा, अपर नगर आयुक्त