गोरखपुर। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) जल्द ही शहर के चारों तरफ अपनी सीमा का विस्तार करेगा जिससे सीमा से लगे 222 गांव प्राधिकरण के दायरे में आ जाएंगे। इससे इन गांवों में नियोजित विकास की राह तो खुलेगी ही गांव के लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए भी परेशान नहीं होना पड़ेगा।
जीडीए ने महायोजना 2041 के निर्माण की तैयारी शुरू कर दी है। इसी के तहत अगले 20 वर्षों में शहर के नियोजित विकास की रूपरेखा तैयार करने के साथ ही सीमा विस्तार का भी काम होगा। यही नहीं इस महायोजना की ही वजह से लंबे समय से लटके 1700 एकड़ के विनियमित क्षेत्र के भी नियमित हो जाने के आसार हैं। इस अवैध क्षेत्र में हजारों की संख्या में निर्माण तो हो गए हैं मगर अभी तक उनका मानचित्र नहीं स्वीकृत हो सका है। इसके लिए समय-समय पर कई बार प्राधिकरण ने शासन को प्रस्ताव भेजा मगर सुनवाई नहीं हो सकी। यह क्षेत्र नियमित होता है तो बड़ी संख्या में लोगों को लाभ तो मिलेगा ही प्राधिकरण की भी अच्छी कमाई होगी। ग्रीन लैंड के मामले में भी निर्णय होगा। फिर ये इस बात का निर्धारण किया जाएगा कि शहर का कौन सा इलाका ओपन लैंड होगा और कौन ग्रीन लैंड।
चार साल पहले ही हुई थी पहल
तत्कालीन डीएम एवं गोरखपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रवि कुमार एनजी ने चार साल पहले ही जीडीए का दायरा बढ़ाने की पहल की थी। उन्होंने संबंधित तहसीलों से संबंधित गांवों का मानचित्र, खसरा-खतौनी और अन्य जानकारियां मांगीं थीं। इसी बीच 2014 का लोकसभा चुनाव शुरू हो गया। चुनाव खत्म हुआ तो एनजी का तबादला हो गया जिससे मामला ठंडा पड़ गया।
लैंड बैंक की समस्या होगी दूर
जीडीए वर्तमान में लैंड बैंक की समस्या से भी जूझ रहा है। प्राधिकरण की खोराबार में दो सौ एकड़ जमीन पर वर्षों से अवैध कब्जा है तो मानबेला की करीब ढाई सौ एकड़ जमीन में से 56 एकड़ में राप्तीनगर आवासीय विस्तार योजना और करीब 30 एकड़ में पीएम और पत्रकारपुरम योजना संचालित है। इसके अलावा जीडीए के पास कहीं एकमुश्त बड़े क्षेत्रफल की जमीन नहीं है। प्राधिकरण का दायरा बढ़ने से लैंड बैंक भी बढ़ेगा।
नियोजित विकास के लिए दायरा बढ़ाना जरूरी
जीडीए सचिव राम सिंह गौतम का कहना है कि जनसंख्या बढ़ने की वजह से शहर का दायरा भी दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। ऐसे में अगर प्राधिकरण ने भी समय पर सीमा विस्तार नहीं किया तो वहां बेतरतीब विकास हो जाएगा, जिसे बाद में सही कर पाना मुश्किल होगा। महायोजना 2041 बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। टाउन प्लानर ने काम भी शुरू कर दिया है। इसी के तहत प्राधिकरण का सीमा विस्तार भी प्रस्तावित है।
जीडीए : एक नजर में
- पांच जनवरी 1977 को हुई प्राधिकरण की स्थापना
- 42449.48 हेक्टेयर में फैला है जीडीए का दायरा
- 13 मार्च 1980 को लागू हुई गोरखपुर महायोजना 1981- 2001
- महायोजना 2021 के लिए दो नवंबर 2007 को मिला शासन से अनुमोदन
- पांच नवंबर 2011 से प्रभावी हुई महायोजना 2021
- 2021 महायोजना के मुताबिक 10765.93 हेक्टेअर विस्तार प्रस्तावित है प्राधिकरण का दायरा