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रोशनी से जगमग हुआ शहर, गूंजा ‘हैप्पी दिवाली’

Thu, 19 Oct 2017 07:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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गोरखपुर में धूमधाम से दिवाली मनाई गई। - फोटो : amar ujala
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गोरखपुर। अंधेरे पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पर्व दीपावली गुरुवार को शहर में धूमधाम से मनाई गई। घरों की छतों के मुंडेर के साथ स्वागत द्वार पर दीपों की सुंदर कतार व टिमटिमाती रंग-बिरंगी लाइटों ने जहां रोशनी बिखेरी, वहीं आतिशबाजी की रंगीन चकाचौंध से महानगर गुलजार रहा। देर रात तक उत्सव व उमंग का माहौल छाया रहा। लोगों ने एक दूसरे को मुंह मीठा कराते हुए दीपावली की शुभकामनाएं दी।

लंका विजय के बाद भगवान राम के अयोध्या आगमन की खुशी में मनाया जाने वाले इस पर्व के प्रति लोगों का उत्साह चरम पर था। दिन भर की साफ-सफाई के बाद शाम ढलते ही घरों और प्रतिष्ठानों में समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी व शुभ के देवता भगवान गणेश का पूरे विधिविधान के साथ आह्वान किया गया। इसके बाद शुरू हुआ दीपों को सजाने का सिलसिला, जो देर शाम तक चलता रहा। हालांकि, पटाखों की गूंज दोपहर से सुनाई देने लगी लेकिन पूजन के बाद इसमें तेजी आ गई। देर रात तक पटाखों की ध्वनि नगर में गूंजती रही। आसमान मेें एक साथ छूटते सैकड़ों रॉकेट, अनार, घिरनी, फुलझड़ियां माहौल को खुशनुमा बना रहे थे। शहर के व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को भी आकर्षक ढंग से सजाया गया था। पूजा-अर्चना कर व्यवसाइयों ने कामना की कि वर्ष भर उनके यहां ग्राहकों की रुझान उनकी ओर बना रहे। उपहार देकर बधाई देने का क्रम भी देर रात तक चलता रहा। शाम तक चलती रही खरीदारी दीपावली के दिन भी शहर के बाजार सुबह से ही सज गए। खरीदारों भी सुबह से बाजार मेें निकलने शुरू हो गए और यह क्रम शाम तक चलता रहा। गुरुवार को सर्वाधिक भीड़ लाइ-गट्टा, मिठाई व पटाखों की दुकानों पर देखने को मिली। सूखी मिठाइयों, ड्राई फ्रूट्स और बेसन व मोतीचूर के लड्डू के प्रति लोगों का विशेष रुझान दिखा।
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फूलों के बाजार में तेजी पूजन कार्य में फूलों का विशेष महत्व होता है। गुरुवार को भी इसके चलते फूलों का बाजार भी गर्म रहा। कमल के फूल की तो बाकायदा बोली लग रही थी। जो रेट बुधवार को 20 से 40 रुपये तक था, वो गुरुवार को 70 रुपये तक पहुंच गया। शाम होते-होते बाजार से कमल के फूल गायब हो गए। घरों के सजाने के लिए बनावटी फूलों व गुलदस्तों की दुकान पर भी भारी भीड़ देख गई। फूलों की सजावट, रंगोली ने मन मोहा दीपोत्सव के अवसर पर फूलों व रंगोली से घर की सजावट मनमोहक रही। इसके लिए लोगों ने तरह-तरह के प्रयोग किए। कुछ ने जहां रंग-बिरंगे फूलों से अपनी चौखट को सजाया तो कुछ ने रंगोली के माध्यम से अपनी प्रतिभा बिखेरी। कुछ ने मां लक्ष्मी व गणेश की आकृति बनाई तो कुछ ने प्राकृतिक दृश्य बनाया। जुआ खेल किया परंपरा का निर्वाह कई घरों में अमावस्या जगाने के लिए जुआ खेलने की परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि इस रात जिसने जुआ खेला और जीता, उसके घर साल भर लक्ष्मी आएंगी। इस मकसद से शहर में कई स्थानों पर जुए का खेल हुआ। सारी रात हुए इस खेल में कुछ ने बाजी मारी जबकि कुछ कंगाल भी हुए। खूब बिके पटाखे गोरखपुर। पर्यावरण संरक्षण की सारी जद्दोजहद दिवाली पर बेमानी दिखी। महानगर में लोगों ने जमकर पटाखे की खरीदारी की। हालांकि, पटाखों के लिए जिला प्रशासन की ओर से स्थान निश्चित किया गया था, बावजूद इसके शहर के कई अन्य जगहों पर भी चोरी-छिपे अस्थाई दुकानों पर पटाखा बिकते देखा गया।
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पंडालों पर उमड़े लोग शहर में कई स्थानों पर आकर्षक ढंग से सजाए गए मां लक्ष्मी प्रतिमा के पंडालों में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। घर में पूजन के बाद लोग शहर में निकले और बेतियाहाता, आजाद नगर, बशारतपुर, जिला अस्पताल, बक्शीपुर घंटाघर आदि स्थानों पर मां लक्ष्मी का दर्शन किए।
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