गोरखपुर। विद्यार्थियों के किशोर मन को समझने, उन्हें सही दिशा दिखाने और गलत हरकतों को रोकने के लिए अधिकारियों और प्रधानाचार्यों ने तीन घंटे के मंथन के बाद आए अहम सुझावों को लागू करने का निर्णय लिया है। बैठक के दौरान स्कूल से घर तक छात्र-छात्राओं की सुरक्षा पर चर्चा हुई। तय हुआ कि स्कूल की हर कक्षाओं में एक विद्यार्थी को पॉवर एंजल बनाया जाए, जो सभी विद्यार्थियों की समस्याओं को नोट करेगा। वह शिक्षक से चर्चा कर दूसरे विद्यार्थियों को खतरों से आगाह भी करेगा।
यूपी बोर्ड, सीबीएसई, संस्कृत बोर्ड और आईसीएसई से संबद्ध इंटरमीडिएट कॉलेजों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों की बैठक बुधवार को गोरखपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षा भवन सभागार में हुई। डीएम व अन्य विभागों के आला अधिकारियों की मौजूदगी में हुई बैठक में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा की समीक्षा की गई। डीएम राजीव रौतेला ने कहा कि शिक्षक और प्रधानाचार्य अनुशासन बनाएं लेकिन विद्यार्थियों और अभिभावकों से संवाद भी रखें। ताकि उन्हें इस बात का अहसास हो कि जो पहल हो रही है वह उनके बेहतरी के लिए है। स्कूलों में चारो तरफ सीसीटीवी लगाए जाएं और छुट्टी होने के बाद सभी कक्षाओं को चेक करें। ध्यान से देखें कि कोई बच्चा छूटा तो नहीं है। अभिभावकों के साथ महीने में दो बार मीटिंग करें और उनकी समस्याओं से समझें। वहीं अभिभावक भी बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार करें। अगर ऐसा हम कर लें तो बहुत सारी समस्याएं और गलतफहमी खुद दूर हो जाएगी।
बच्चों की गतिविधियों को देखे, काउंसिलिंग कराएं : एसएसपी
एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने कहा कि अभिभावक बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान दें। गाड़ी अगर तेज स्पीड से और बगैर हेलमेट चलाते हैं तो तत्काल टोक दें। वहीं स्कूलों में हर महीने विद्यार्थियों की काउंसिलिंग कराई जाए। ताकि उनके भीतर अगर कोई उलझन है, तो उसे दूर किया जा सके। बच्चों को ट्रैफिक नियमों के बारे में जागरूक करें। उन्होंने स्कूल के वाहनों की फिटनेस समय से चेक कराने और क्षमता से अधिक बच्चों को बैठने न देने की भी सलाह दी। बैठक में संयुक्त शिक्षा निदेशक योगेंद्र नाथ सिंह, डीआईओएस ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह भदौरिया, आरटीओ डीडी मिश्र ने भी अपने विचार रखे। इस दौरान प्रबंधक अजय शाही, हेमंत मिश्रा, सृंजय मिश्र, आरएन गुप्ता, अरविंद पांडेय, फूलचंद यादव आदि मौजूद रहे।
ये सुझाव आए
ऑटो की सीटिंग क्षमता पर ध्यान दें
सभी ड्राइवरों का लाइसेंस चेक करें।
पुलिस वेरीफिकेशन के बाद ही ड्राइवर रखें।
स्कूल बंद होने पर हर कक्षा को चेक करें।
अनुशासन के लिए ज्यादा सख्ती न बरतें।
अभिभावकों से अच्छे से पेश आएं।
प्रार्थना सभा में अच्छी आदतें सिखाएं।
नैतिक शिक्षा पर अधिक जोर दें।