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नन्हीं नौ दुर्गा को पूज पूरी हुई नवमी की पूजा

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गोरखपुर।
कहीं भजनों की गूंज तो कहीं होम की आहुति के साथ ‘स्वाहा’ के स्वर, नवरात्र की नवमी का नजारा ही गजब रहा। हवन कुंड के पवित्र धुएं से घिरे देवी मंदिर और पूजा पंडाल धूप, अगरबत्ती और हवन की खुशबू से सराबोर रहे। घरों में भी नवमी की छटा निराली रही। कई घरों में नौ कन्याओं के रूप में नौ दुर्गा पधारीं। लोगों ने श्रद्धा से इनके पांव पखारे और कन्या पूजन किया।
तड़के ही देवी भक्तों ने नवमी पूजा की तैयारियां शुरू कर दी थीं। जहां लोग घरों पर कन्या पूजन की व्यवस्था में जुटे रहे, वहीं हवन सामग्री जुटाने में भी लोगोें ने काफी मेहनत की। काफी संख्या में देवी भक्तों ने तड़के ही देवी दर्शन के लिए माता के मंदिरों का रुख कर लिया। मंदिरों और पूजा पंडालों से गूंजते देवी गीत माहौल को माता की भक्ति रस से सराबोर कर रहे थे। सुबह से ही देवी मंदिरों पर श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा तो देर शाम तक छंटता नजर न आया। कुछ ने घर पर हवन कराया तो काफी लोगों ने मंदिरों और पंडालों में सामूहिक हवन कर नौ दिन के उपवास की पूर्णाहुति की। माता मातेश्वरी सेवा दरबार में महानवमी पर यज्ञ पूर्णाहुति, गोदभराई, महाआरती और प्रसाद वितरण हुआ।
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कहीं भंडारा तो कहीं सांस्कृतिक कार्यक्रम
नवरात्र के अंतिम दिन देवी भक्तों में उल्लास देखते ही बना। शहर में कई जगहों पर भंडारा हुआ तो कुछ जगहों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। दुर्गाबाड़ी में बंगाली पूजा समिति ने सुबह नवमी पूजा के बाद पुष्पांजलि एवं प्रसाद वितरण किया। शाम को देवी आरती के बाद मां का जागरण हुआ। लोको फील्ड में दोपहर को बच्चों के लिए प्रतियोगिताएं हुईं। प्रसाद बांटा गया। रात में ‘डांस का महा मुकाबला’ का फाइनल हुआ। दीवान बाजार में दिन में पुष्पांजलि एवं प्रसाद वितरण तो रात में देवी आरती हुई।

आज गाजे-बाजे के साथ होगी माता की विदाई
गाजे-बाजे के साथ शनिवार को देवी प्रतिमाओं की विदाई होगी। नवमी को ही पूजा समितियों ने विसर्जन की तैयारियां शुरू कर दीं। बंगाली पूजा समितियों के पंडालों में सुबह महिलाएं सिंदूरखेला से मां को विदा करेंगी। वहीं अन्य पंडालों में भी आरती, पूजन आदि कार्यक्रम के बाद माता की प्रतिमाएं विदा की जाएंगी। प्रशासन ने भी विसर्जन के लिए तैयारी पूरी कर ली है। विसर्जन जुलूस के मार्गों पर सुरक्षा के लिए पुलिस भी तैनात रहेगी।
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शाम 5:03 के बाद विसर्जन का मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि माता की प्रतिमा का विसर्जन दशमी के दिन श्रवण नक्षत्र में किया जाता है। शनिवार को दशमी तिथि है, मगर श्रवण नक्षत्र शाम पांच बजकर तीन मिनट से शुरू होगा। इसलिए उत्तम मुहूर्त इसके बाद ही है। इसके बाद ही प्रतिमा विसर्जन शुभ होगा।
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