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सभी इंसेफेलाइटिस मरीजों की अब स्क्रब टायफस जांच

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गोरखपुर।
इंसेफेलाइटिस से हो रही मौतों में कमी लाने के लिए शासन कोई कोरकसर नहीं छोड़ना चाहता। इसी कवायद में अब सभी इंसेफेलाइटिस मरीजों की स्क्रब टायफस जांच कराने का आदेश आया है। अब तक अबूझ पहेली बनी एईएस (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) का कारण जानने की कवायद में यह कदम उठाया गया है। सीएमओ को निदेशक संचारी रोग की ओर से सभी इंसेफेलाइटिस मरीजों का सैंपल मेडिकल कॉलेज लैब भेजने को कहा गया है।
इंसेफेलाइटिस पर अंकुश लगाने के लिए शासन और स्वास्थ्य विभाग हर तरह के प्रयास कर रहा है। एक ओर जहां टीकाकरण के जरिए जापानी इंसेफेलाइटिस पर काफी हद तक काबू पाने में सफलता मिली है तो वहीं दूसरी ओर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को एईएस से बचाने की कोशिशें की जा रही हैं। इसके बाद भी एईएस काबू में नहीं आ रहा। आईसीएमआर (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) और एनआईवी (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी) के वैज्ञानिकों ने एईएस के 60 फीसदी मरीजों में स्क्रब टायफस का संक्रमण पाया था। विशेषज्ञ अब इसेे एईएस का संभावित कारण मानते हुए शोध को आगे बढ़ा रहे हैं। पिछले दिनों शोध के नतीजे शासन तक पहुंचे। इसके बाद निदेशक संचारी रोग ने सीएमओ को सभी इंसेफेलाइटिस मरीजों के सैंपल मेडिकल कॉलेज भेजने को कहा। इन सैंपलों में स्क्रब टायफस की जांच होगी।
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जिला अस्पताल समेत ईटीसी से भेजे जाएंगे सैंपल
मेडिकल कॉलेज के साथ ही ईटीसी और जिला अस्पताल के इंसेफेलाइटिस वार्ड में आने वाले मरीजों के सैंपल अब मेडिकल कॉलेज लैब भेजे जाएंगे। इसके पीछे मंशा यह है कि ज्यादा से ज्यादा सैंपल जांचकर विशेषज्ञ एईएस के कारण को लेकर सटीक नतीजे पर पहुंच सकें।
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ये है स्क्रब टायफस
स्क्रब टायफस एक बैक्टीरिया है, जो बड़े घास वाले मैदान में पाए जाने वाले चूहों और गिलहरियों के जूं में पाया जाता है। जब ये जूं किसी इंसान को काटता है तो लार के साथ रक्त में पहुंचकर उसे संक्रमित कर देता है।
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