गोरखपुर। गोरखपुर महोत्सव के सफल आयोजन पर भले ही जिला प्रशासन अपनी पीठ थपथपा रहा हो। मगर महोत्सव ने गोरखपुर यूनिवर्सिटी को 10 लाख रुपये की चपत लगाई है। इसमें शामिल होने आई फर्मों ने बिना मीटर लगाए ही धड़ल्ले से बिजली का इस्तेमाल किया। जिम्मेदारों की बेरुखी से यूनिवर्सिटी प्रशासन को जनवरी में 10 लाख रुपये अतिरिक्त बिजली का बिल भुगतान करना पड़ा। इसके पूर्व यूनिवर्सिटी का लगभग 30 लाख रुपये बिल आता रहा है। ताज्जुब है कि अब तक यूनिवर्सिटी प्रशासन लापरवाही करने वाले जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं कर सका है।
गोरखपुर महोत्सव के मुख्य समारोह का आयोजन 11-13 जनवरी और सात दिवसीय शिल्प महोत्सव का आयोजन गोरखपुर यूनिवर्सिटी के खेल मैदान में हुआ था। इसमें शामिल होने आई फर्मों को बिजली के इस्तेमाल के लिए मीटर से कनेक्शन लेना अनिवार्य किया गया था। वहीं बकायदा इंजीनियरिंग विभाग के अभियंता को निरीक्षण कर बिजली व्यवस्था जांचने की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन अभियंता ने मुआयना करने की जरूरत नहीं समझी, इससे फर्मों ने चोरी से बिजली का इस्तेमाल किया और महोत्सव के बाद लौट गईं। फरवरी में जब गोरखपुर यूनिवर्सिटी को बिजली का बिल मिला तो इसमें अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज हुई। मामला कुलपति के संज्ञान में आया तो उन्होंने आनन-फानन में जिम्मेदारों को तलब किया। बैठक में वित्त अधिकारी, विद्युत विभाग के अभियंता और एसडीओ शामिल हुए। अपना पक्ष रखते हुए विद्युत विभाग ने कहा कि यूनिवर्सिटी के अवर अभियंता की हीलाहवाली से विद्युत का बिल अधिक आया है।
जनवरी के बिल में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज हुई है। इसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। यूनिवर्सिटी प्रशासन को चूना लगाने वाले किसी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे।
- बीरेंद्र चौबे, वित्त अधिकारी गोरखपुर यूनिवर्सिटी