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रैंकिंग सुधारना बड़ी चुनौती, कई कमियां अब भी बरकरार

Sat, 30 Dec 2017 12:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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नगर निगम। - फोटो : Amar Ujala
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स्वच्छता सर्वेक्षण में इस बार शहर की रैंकिंग सुधारना नगर निगम के लिए चुनौतीपूर्ण होगी। जिन कमियों की वजह से गोरखपुर पिछली बार पिछड़ गया था, उन्हें दूर करने में अब तक बहुत सफलता नहीं मिल सकी है। ऐसे में मार्च तक इन्हें दूर कर पाना नगर निगम के लिए आसान नहीं होगा।
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चार जनवरी से शुरू होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग इस बार कुल 4000 अंकों के आधार पर होगी। इसके अंतर्गत सफाई व्यवस्था, घर-घर से कूड़ा उठाने, गीले और ठोस कूड़े को अलग करने, उसे ट्रेंचिंग ग्राउंड तक ले जाने, कूड़े का निस्तारण, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, लोगों में सफाई के प्रति जागरूकता, स्वच्छता एप डाउनलोड करना, शहर के बड़े रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन के 500 वर्ग मीटर के क्षेत्र में बेहतर सफाई व्यवस्था, सर्विस चार्ज लगाना, गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने समेत करीब 70 बिंदुओं पर रैंकिंग तय की जाएगी, लेकिन इनमें से कई मामलों में स्थिति वैसी ही है, जैसी पिछले सर्वेक्षण के दौरान थी। इन सारे मानकों को 31 दिसंबर तक की समय सीमा में पूरा कर पाना काफी मुश्किल है। विभिन्न मानकों की वास्तविक रिपोर्ट नगर निगम को स्वच्छता सर्वेक्षण की वेबसाइट पर अपलोड कर देनी है। अगर सर्वेक्षण टीम को दावा गलत मिलता है तो अंकों में कटौती भी झेलनी होगी। 

अभी तक नहीं बन सका सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट
कूड़े का निस्तारण और उसके प्रोसेगिंग के लिए सर्वेक्षण में 350 अंक निर्धारित हैं। इस मोर्चे पर निगम के असफल होने की आशंका है, क्योंकि अब तक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट नहीं बन सका है। शहर में रोजाना करीब 600 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है, लेकिन इसके निस्तारण की अब तक कोई व्यवस्था नहीं हो सकी है।
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खुले में पड़ा रहता है कूड़ा
शहर के 32 स्थायी कूड़ा पड़ाव केंद्र (लालडिग्गी, आरटीओ, भगवती स्कूल, दुर्गाबाड़ी, माल गोदाम, सिंचाई डाक बंगला, खूनीपुर, गोरखनाथ मंदिर, वीनस सिनेमा आदि) पर कूड़ा खुले में ही पड़ा रहता है। स्थिति यह है कि नगर निगम इस कूड़े पर मिलिथियान तक का छिड़काव तक नहीं कर रहा। इससे बीमारियां भी फैल रही हैं। वहीं आज कल तक रुस्तमपुर स्थित आजाद चौराहे को कूड़ेदान बना दिया गया है। 

इन इलाकों का होगा निरीक्षण
सर्वेक्षण एजेंसी झुग्गी बस्तियां, नियोजित कॉलोनी, मुख्य सार्वजनिक स्थान, मुख्य बाजार क्षेत्र, धार्मिक स्थान, शहर का सबसे बड़ा बस स्टैंड, सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन, सॉलिड वेस्ट उत्पादन करने वाले होटल, मैरिज हॉल, साप्ताहिक सब्जी बाजार क्षेत्र, सामुदायिक शौचालयों का निरीक्षण करेगी। इसके बाद मार्किंग होगी।

थर्ड डिवीजन से हुआ था गोरखपुर
साफ सुथरे और स्वच्छ शहर के लिए पिछली बार हुए सर्वेक्षण में कुल 2000 अंकों के आधार पर रैंकिंग की गई थी। इसमें गोरखपुर नगर निगम 37 प्रतिशत अंक के साथ थर्ड डिवीजन से पास हुआ था। इसे 456 अंकों के साथ 314वीं रैंक हासिल हुई थी। 

इन मामलों में बेहतर हुई स्थिति
खुले में शौच से मुक्त शहर
नगर निगम ने शहर को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित कर दिया है। अगर 30 दिसंबर तक किसी की आपत्ति नहीं आती है तो 31 को नगर निगम शहर को ओडीएफ घोषित कर देगा। 

रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था शुरू
प्रमुख बाजारों में रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था शुरू कर दी गई है। इसका लाभ रैंकिंग में मिलेगा।

डॉक्यूमेंटेशन से बेहतर होगी स्थिति
नगर निगम ने इन सभी चीजों को डॉक्यूमेंटेशन तैयार करना शुरू कर दिया है। इससे रैंकिंग बेहतर करने में मदद मिलेगी।

बाजार, स्कूलों की रैंकिंग करना
नगर निगम ने बाजारों, स्कूलों, होटलों आदि की रैंकिंग कर एक मानक को पूरा कर लिया है। रैंकिंग सुधारने में इसका भी फायदा मिलेगा। 

स्वच्छता सर्वेक्षण में सबसे ज्यादा जरूरी है कि लोगों का स्वच्छता के प्रति जागरूक होना। इसके लिए हम संचार माध्यमों के जरिए लोगों से लगातार अपील कर रहे हैं। गोरखपुर महोत्सव के दौरान भी इसका प्रचार-प्रसार किया जाएगा। वैसे नगर निगम अपने स्तर पर स्वच्छ सर्वेक्षण के विभिन्न मानकों को बेहतर बनाने के लिए काम पूरा किया है। उम्मीद है कि इस बार गोरखपुर की स्थिति सुधरेगी।
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- प्रेमप्रकाश सिंह, नगर आयुक्त 
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