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गीडा के 83 उद्योगपतियों के प्लाट निरस्त

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अमर उजाला ब्यूरो
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गोरखपुर। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) की 50वीं बोर्ड बैठक में कई अहम फैसले हुए। कमिश्नर अनिल कुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में गीडा में आवंटित 83 औद्योगिक भू-खंडाें का आवंटन निरस्त कर दिया गया। इनमें आठ उद्योगपतियों ने तो रजिस्ट्री कराने के साथ ही निर्माण भी करा लिया है। इस फैसले की सूचना बोर्ड बैठक से बाहर निकलते ही न केवल उद्योगपति बल्कि गीडा महकमे के अफसर, कर्मचारी भी सन्न रह गए।
दो साल पहले गीडा की तरफ से 26 औद्योगिक प्लाटों के आवंटन के लिए विज्ञापन निकाला गया था। मगर इनकी अनदेखी कर 83 प्लाट आवंटित कर दिए गए। शिकायत पर पूर्व कमिश्नर पी गुरु प्रसाद ने तत्कालीन गोरखपुर सीडीओ कुमार प्रशांत से मामले की जांच कराई थी। जांच में इस मामले के खुलासे के साथ ही कुछ और गड़बड़ियां सामने आई थीं। ये सभी अनियमितताएं गीडा के तत्कालीन सीईओ ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी के समय हुई। पूर्व कमिश्नर ने इन पर कार्रवाई के लिए सिफारिश की थी।
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उन्होंने बोर्ड बैठक में प्लाट भी निरस्त करने का निर्णय किया था, मगर क ार्रवाई की सुगबुगाहट पाकर ज्ञान प्रकाश हाई कोर्ट चले गए। उन्होंने दलील दी कि एक जूनियर ऑफिसर, सीनियर आफिसर की जांच नहीं कर सकता । इस पर कोर्ट ने उनके खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाते हुए कहा कि शासन चाहे तो इस मामले की जांच किसी सीनियर ऑफिसर से करा सकता है। इसके बाद यह मामला थोड़ा ठंडा पड़ गया। इसी बीच ज्ञान प्रकाश प्रोन्नति पाकर आईएएस हो गए और उधर शासन ने पूर्व चकबंदी आयुक्त हरिओम को उनके खिलाफ जांच सौंप दी। उनकी जांच में भी अनियमितता की पुष्टि हुई। इसके अलावा शहर के ही दाताराम सिंह की शिकायत पर लोकायुक्त ने भी ज्ञान प्रकाश के खिलाफ जांच शुरू कर दी थी। लोकायुक्त की जांच में गड़बड़ी की पुष्टि हुई। शासन और लोकायुक्त की इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कमिश्नर ने बुधवार को हुई गीडा बोर्ड बैठक में सभी प्लाट निरस्त करने का निर्देश दिया, जिस पर बोर्ड के सदस्यों ने भी अपनी रजामंदी दे दी।
बैठक में गीडा के सीईओ ओएन सिंह, डीएम राजीव रौतेला, अपर निदेशक कोषागार अतुल कुमार श्रीवास्तव, मुख्य अभियंता विद्युत एके सिंह, एक्सईएन जल निगम डीपी मिश्रा, मुख्य अभियंता नगर निगम सुरेश चन्द समेत कई सदस्य मौजूद रहे।
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नौसढ़ से कालेसर तक एलईडी लाइट पर रोक
गोरखपुर। नौसढ़ से कालेसर तक फोरलेन पर एलईडी लाइट लगाने पर कमिश्नर अनिल कुमार ने रोक लगा दी है। बोर्ड बैठक में उन्होंने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए शासन से अनुमति लेने का बाद ही लाइट लगाने को सही बताया। बता दें कि करीब दो साल पहले पैडलेगंज से कालेसर तक बने फोरलेन पर लाइट लगाने का निर्णय हुआ था। तय हुआ था कि जीडीए लाइट लगाने का काम करेगा। मगर नौसढ़ तक ही प्राधिकरण की सीमा होने की वजह से उसने वहीं तक लाइट लगवाई। उधर योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही गीडा ने नौसढ़ से लेकर कालेसर तक भी एलईडी लाइट लगाने की पहल की। तय हुआ कि गीडा फंड देगा और जीडीए इसका निर्माण कराएगा। मगर बुधवार को हुई बोर्ड बैठक में इस पर रोक लगा दी गई। इसी तरह लीडा की भांति गीडा के अधिसूचित क्षेत्र के तहत उद्योगों आदि की स्थापना के लिए काश्तकार से उद्यमियों द्वारा सीधे भूमि क्रय करने के मामले में फैसला नहीं हो सका। तय हुआ कि प्रस्ताव को संशोधित कर दोबारा अगली बोर्ड बैठक में रखा जाए। वहीं तय हुआ कि अब गीडा के एक लाख से अधिक के काम ई-टेन्डर के माध्यम से कराए जाएंगे।
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