चिलुआताल के नकहा नंबर दो कोईलहवा में रविवार को जाम हटाने गई महिला आईपीएस चारु निगम पर पथराव और पुलिस टीम पर हमला मामले में एफआईआर दर्ज कर छह महिलाओं को नामजद किया गया है। साथ ही 50 अज्ञात लोगों पर सरकारी कामकाज में बाधा डालने का मामला भी दर्ज हुआ। हालांकि एफआईआर में भाजपा विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल का नाम नहीं है लेकिन पुलिस ने उन्हें जांच के दायरे में रखा है। एफआईआर चौकी इंचार्ज वीरेंद्र कुमार यादव की तहरीर पर हुई है।
मालूम हो कि इस मामले में भाजपा के नगर विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल का नाम भी आया। आरोप लगा कि विधायक ने ग्रामीणों का पक्ष लिया और महिला आईपीएस को डपट दिया था, इस कारण वह फफक कर रो पड़ीं थीं। मामला उछला तो एसपी सिटी गणेश साहा और एएसपी चारु निगम रविवार देर रात करीब दो बजे चिलुआताल थाने पहुंची। चौकी इंचार्ज की तहरीर पर एफआईआर भी हो गई। पुलिस ने धारा 144 के उल्लंघन, सरकारी काम में बाधा, मारपीट, जाम लगाकर आसपास के लोगों में भय फैलाने, 7 सीएलए की धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। एफआईआर होने के बाद ज्यादातर ग्रामीण घर छोड़कर भाग गए हैं। सबको गिरफ्तारी का डर सता रहा है।
विधायक की भूमिका की जांच शुरू
गोरखपुर। विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल और आईपीएस चारु निगम के बीच कहासुनी का मामला गरमाता जा रहा है। पुलिस अफसरों ने गोपनीय तरीके से विधायक की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। जांच को लेकर जिले के एक आला अफसर ने पत्र भी जारी कर दिया है। साथ ही वीडियो और ऑडियो क्लिप की जांच के आदेश भी दे दिए हैं। मालूम हो कि पूरे घटना की वीडियोग्राफी कराई गई थी, जिसे आधार बनाकर पुलिस विधायक के नाम को शामिल कर सकती हैं। उधर आईपीएस चारु निगम ने अपने अफसरों को सूचना देने के साथ खुद के साथ हुई अभद्रता की शिकायत की थी, जिसके बाद आईपीएस एसोसिएशन भी सक्रिय हो गया और फिर देर रात पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया।
जिला पुलिस की सुस्ती पर बिफरे आईजी
शराब की दुकान हटाने को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान महिला आईपीएस चारु निगम और भाजपा विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल के बीच हुई झड़प को आईजी मोहित अग्रवाल ने गंभीरता से लिया है। जिला पुलिस की सुस्ती पर सवाल खड़े करते हुए उन्होंनेे जवाब मांगा है। आईजी ने फैक्स के जरिये एसएसपी से स्पष्टीकरण मांगते हुए घटना की सूचना समय से न देने पर नाराजगी जताई है। पत्र में साफ कहा गया है कि इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी समय से अफसरों को सूचित न करना कहीं से भी सही नहीं है। देर शाम आला अफसरों को घटना की जानकारी मीडिया और अन्य लोगों से हुई। पुलिस ने कार्रवाई करने में भी सुस्ती बरती। विस्तृत रिपोर्ट के साथ ही आईजी के जवाब मांगने के बाद से हड़कंप मच गया है।