अकेले सिद्धार्थनगर में लागू है यह कानून
नहर कमांड एरिया कानून से बर्बाद हो रही मशहूर धान की खेती, किसान चाहते हैं मुक्ति
सिंचाई विभाग ने नहर कमांड एरिया घोषित किया था
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। हैरानी की बात है, नहर कमांड एरिया कानून पूरे सूबे में सिर्फ अपने ही जिले में लागू है। वह भी सिर्फ 58 किलोमीटर क्षेत्र के लिए। यह मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में भी है। फिर भी अब तक किसानों के पक्ष में कोई कदम नहीं उठाया जा सका है।
आजादी के बाद जब गांवों में सरकारी नलकूपों लगाए जाने लगे तो इलाके में सिंचाई की सुदृढ़ व्यवस्था को देखकर सिंचाई विभाग ने क्षेत्र को नहर कमांड एरिया घोषित कर दिया था। नहर कमांड एरिया कानून के तहत यहां नलकूपों की स्थापना पर प्रतिबंध लगा दिया गया। अब जबकि न जलाशय उस हाल में रहे, न नहरें। जहां हैं भी, नहरों में पानी नहीं के बराबर आ रहा है। इसके बाद भी नलकूप न लगने से किसान परेशान हैं। अधिशासी अभियंता (नलकूप) त्रयबंक सिंह भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि ब्रिटिश हुकूमत में स्थापित जमींदारी नहर प्रणाली के परिक्षेत्र में सरकारी, गैर सरकारी नलकूप लगाने की मनाही है। कमांड एरिया कानून इसकी मुख्य वजह है।
सबसे बड़ी बात यह कि यह इलाका डार्क जोन भी नहीं है कि यहां बोरिंग पर रोक हो। जल निगम की ओर से शासन स्तर पर भेजी जाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक जिले के उत्तरी क्षेत्र बर्डपुर ब्लॉक में स्थापित जमींदारी नहर प्रणाली से संबंधित क्षेत्रों में भूमिगत जलस्तर 7.25 मीटर है। इसकी पुष्टि जल निगम के अधिशासी अभियंता पवन यादव ने की है।
4221 हेक्टेयर था नहर प्रणाली का सिंचाई क्षेत्र
इनसे 243 किमी लंबी नहरें निकाली गईं। नहर प्रणाली का सिंचाई क्षेत्रफल 21116 हेक्टेयर व सिंचाई के लिए प्रस्तावित क्षेत्र में खरीफ में सिंचाई क्षमता का 20 प्रतिशत अर्थात 4221 हेक्टेयर व रबी में 15 प्रतिशत अर्थात 3166 हेक्टेयर है।
एक जिला-एक उत्पाद के तहत यहां के काला नमक धान का चयन किया गया है। क्षेत्र में सिंचाई की व्यवस्था में सुधार के लिए कई स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। नहर कमांड एरिया कानून के बारे में जानकारी लेकर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
-कुणाल सिल्कू, जिलाधिकारी