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इंसेफेलाइटिस के खिलाफ गूंजा जागरूकता का मंत्र

Sun, 17 Dec 2017 09:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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रैली निकालतीं एमपी पीजी कॉलेज की छात्राएं। - फोटो : Amar Ujala
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...ताकि सलामत रहें मासूम, इसलिए इंसेफेलाइटिस के खात्मे का अरमान दिलों में था। जुबां पर इसी संकल्प के नारे थे। एक कंठ से फूटे स्वच्छता उद्घोष को जब दूसरों ने दोहराया तो जंगल तिनकोनिया नंबर दो की गली-गली इंसेफेलाइटिस के खिलाफ इंकलाब से गूंज उठी। फिर तो मानो यह बीमारी के दहन का ‘महामंत्र’ बन गया।
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पहल ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ ने की तो एमपीपीजी कॉलेज, जंगल धूसड़ के शिक्षक-विद्यार्थी और क्षेत्र के गण्यमान्य लोग हमराह बन गए। सुबह 11 बजे एनएसएस के स्वयंसेवक हाथों में इंसेफेलाइटिस से बचाव के उपाय लिखी तख्तियां लिए रैली की शक्ल में कॉलेज परिसर से निकले। यहां से रैली जंगल तिनकोनिया नंबर-2 पहुंची। इस बीच एनएसएस स्वयंसेवियों की चार टोलियों ने घर-घर जाकर लोगों को इंसेफेलाइटिस से बचाव के लिए साफ-सफाई व अन्य जरूरी जानकारियां दीं। रैली का समापन गांव के प्राथमिक विद्यालय परिसर में हुआ। यहीं गोष्ठी हुई। इसमें अपर निदेशक चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण दफ्तर में तैनात जनजागरूकता प्रभारी और गोरखपुर मंडल के संयोजक डॉ. वीके श्रीवास्तव ने बीमारी के कारण, लक्षण और बचाव पर विस्तार से जानकारी दी। संचालन डॉ. अविनाश प्रताप ने किया।

108 नंबर रखें याद : डॉ. श्रीवास्तव
डॉ. वीके श्रीवास्तव ने मन से जुड़ने की जरूरत बताते हुए गोष्ठी में मौजूद विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि वे जागरूकता अभियान को अपने स्तर से भी आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने इसे प्राणरक्षा का अभियान बताते हुए सबसे बड़ा पुण्य करार दिया। गांववालों को उन्होंने बताया कि अगर तेज बुखार के साथ दिमाग गड़बड़ाने लगे, झटका आए, सुस्ती हो तो झोलाछाप के पास न जाकर फौरन 108 पर फोन करें। सभी सीएचसी-पीएचसी पर इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर हैं। यदि जरूरत हुई तो सेंटर खुद मरीज को हायर सेंटर भेजने की व्यवस्था करेंगे। डॉ. श्रीवास्तव ने जापानी इंसेफेलाइटिस से बचाव के लिए शाम के वक्त बच्चों को बाहर न भेजने और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से बचाव के लिए खान-पान और रहन-सहन में सफाई पर जोर दिया।
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इनकी अहम भूमिका
जागरूकता अभियान में एमपीपीजी कॉलेज, जंगल धूसड़ के प्राचार्य डॉ. प्रदीप राव का विशेष योगदान रहा। कॉलेज के शिक्षक डॉ. यशवंत राव और छात्रसंघ के पदाधिकारियों ने भी अहम जिम्मेदारियां निभाईं।

मिली उपयोगी जानकारियां
पता था कि जापानी इंसेफेलाइटिस मच्छर से होता है पर आज पता चला कि ये सिर्फ शाम को काटते हैं। धान के खेतों में पैदा होते होने वाले इन मच्छरों से बचाव के उपाय भी जाने।
- तनु सिंह, बीए प्रथम वर्ष

लोगों को बताऊंगी बचाव
बीमारी के कारण व बचाव की बेहतर जानकारी ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ के कार्यक्रम में मिली। यहीं पता चला कि इसका खतरा सबको है। ये बातें दूसरों को भी बताऊंगी।
- वेदिका गुप्ता, बीए तृतीय वर्ष

जागरूकता से ही सुरक्षा
गोष्ठी में आने से पता चला कि इस भयावह बीमारी से सुरक्षा सिर्फ जागरूकता से ही मिल सकती है। कार्यक्रम में जो जानकारियां मिलीं वो पूरे जीवन भर काम आएंगी।
विवेक विश्वकर्मा, बीए द्वितीय वर्ष

‘फाउंडेशन’ की पहल सराहनीय
इंसेफेलाइटिस से जुड़ी जानकारियों के लिए यह गोष्ठी उम्रभर याद रहेगी। ‘फाउंडेशन’ की पहल सराहनीय है। बीमारी के खात्मे की पृष्ठभूमि बने, अत: जागरूकता जरूरी है।
राहुल गिरि, अध्यक्ष छात्रसंघ

गांव की भलाई पहल
इंसेफेलाइटिस के खात्मे को जगी अलख को और प्रखर करने की कोशिश करूंगा। इस मुहिम से न सिर्फ मासूमों की जान बचेगी बल्कि गांव भी साफ-सुथरे होंगे। ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ बधाई का पात्र है।
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राजकुमार, ग्राम प्रधान (बसपा नेता)
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