बस्ती। नवंबर के दूसरे सप्ताह में बृहस्पतिवार को घना कोहरा और धुंध छाई रही। दृश्यता (विजिबिलिटी) बमुश्किल 25-30 मीटर होने से फोरलेन समेत सभी मार्गों पर वाहन सुबह नौ बजे दिन तक रेंगते नजर आए। कई जगह हादसा होते-होते बचा। मौसम के लगातार बदलाव, तापमान और आर्द्रता में असंतुलन से किसानों और कृषि विज्ञानियों को बुआई में विलंब होने की चिंता सता रही है।आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज फैजाबाद के मौसम विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. पद्माकर त्रिपाठी का कहना है कि दिसंबर तक तापमान का संतुलन कायम हो सकेगा। तब तक अधिकतम-न्यूनतम में उतार-चढ़ाव होता रहेगा। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. रामजी सोनी का कहना है कि ऐसे समय में बच्चों और बुजुर्गों को एकाएक ठंडी से गर्मी या गर्मी से ठंडी जगह पर न ले जाएं। ऐसा न करने पर ब्लड प्रेशर और सांस की तकलीफ हो सकती है। जो लोग अस्थमा, हड्डी रोग, सांस व हृदय रोगों से ग्रसित हैं, वे सुबह गर्म वस्त्र पहन कर निकलें।
रबी के बुवाई में तापमान का रोड़ा ः नवंबर के दूसरे सप्ताह में 33 डिग्री सेल्सियस तापमान खेती के लिहाज से अनुकूल नहीं है। इसे लेकर कृषि विज्ञानी चिंतित हैं। उनके अनुसार, गेहूं की बुआई के लिए जब तक 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे तापमान पहुंचना अनिवार्य है। जबकि चालू हफ्ते में औसत तापमान 33 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया जा रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि गेहूं बुआई के समय 20 से 22 डिग्री, बढ़त के समय 25 डिग्री और पकने के समय 14 से 15 डिग्री तापक्रम उत्तम होता है। तापमान अधिक होने पर फसल जल्दी पक जाएगी लेकिन उपज घट जाएगी। वातावरण में 50-60 प्रतिशत आर्द्रता उपयुक्त है। मौसम विज्ञानियों को चिंता सताने लगी है कि यदि 15 नवंबर तक अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस या उससे नीचे नहीं आया तो बुआई प्रभावित होगी।
कोहरे में बरतें सावधानी
- सभी वाहनों में फाग लाइट अवश्य लगवाएं।
- लाइट जला कर चलें ताकि दूसरे को दूर से पता चल सके कि सामने से कोई वाहन आ रहा है।
- सड़क के किनारे वाहन खड़ा करने से बचें। यदि खड़ा करें तो पार्किंग लाइट जलाए रखें।
- वाहनों को क्रॉस या ओवरटेक करते समय सतर्क रहें।
- लाइट ग्लो साइन वाले टेप या रिफ्लेक्टर लगवाएं।