गोरखपुर।
डीएम राजीव रौतेला के अवकाश से लौटते ही पांच दिन से सुस्त पड़े अफसर, उनवल में हो रही मौतों को लेकर संजीदा हो गए। सैकड़ों की संख्या में गांव में सफाईकर्मी लगा दिए गए तो पीएचसी पर स्वास्थ्य सेवाएं दुरुस्त कर दी गई। डीएम की अनुपस्थिति में किसी आला अफसर ने गंभीरता से बीमारियों की वजह, रोकथाम और इलाज को लेकर सतर्कता नहीं दिखाई। यही नहीं स्वास्थ्य महकमा अभी भी उनवल में डायरिया से तीन ही मौत बता रहा है जबकि ग्रामीणों का दावा आठ मौतों का है।
खुद सीएमओ के आंकड़े बताते हैं कि पिछले 10 दिनों में उनवल पीएचसी में 730 मरीज आए, जिसमें से 396 उल्टी दस्त के थे। इसमें 83 को भर्ती किया गया। 54 स्वस्थ होकर घर चले गए जबकि 29 की हालत गंभीर होने पर उन्हें जिला अस्पताल रेफर करना पड़ा। मरने वालों में पूजा पुत्री जगदीश, माधुरी मिश्रा पत्नी अष्टभुजा तथा आराधना पुत्री कन्हैया साहनी का नाम शामिल है।
स्वास्थ्य विभाग बीमारी की मूल वजह ग्रामीणों के छोटी मरी मछली खाना और दूषित पानी पीना बता रही है। शुक्रवार को डीएम ने उनवल का निरीक्षण किया। उनका कहना है कि डायरिया की स्थिति अब नियंत्रण में है। उन्होंने गांव में भ्रमण कर पीड़ित परिवारों के साथ ही ग्रामीणों से भी मुलाकात की। आश्वस्त किया कि मृतकों के परिवार को आर्थिक मदद के लिए वे शासन से सिफारिश करेंगे। उन्होंने तहसील के अफसरों को पीड़ित परिवारों की आर्थिक स्थिति का सर्वे कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा।
देर से पहुंचे पशु चिकित्सक का वेतन रुका
गोरखपुर। डीएम ने गांव के ही बगल में स्थित पशु चिकित्सालय का भी निरीक्षण किया। इस दौरान सुबह 11 बजे तक पशु चिकित्सक के नहीं पहुंचने पर डीएम ने नाराजगी व्यक्त करते हुए उनका वेतन रोकने और उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की संस्तुति की। वहीं अधीक्षण अभियंता जल निगम को निर्देश दिया कि पानी की टंकी की साफ -सफ ाई कराएं, दवा डलवाएं और पूरी पाइप लाइन ठीक कराएं। उन्होंने डीपीआरओ को निर्देश दिया कि सफाईकर्मी लगाकर पूरे ग्राम पंचायत की सफ ाई कराई जाए। नालियों से निकलने वाले मलबे को दूर डलवाया जाए और नियमित चूना और दवा का छिड़काव हो। इसपर डीपीआरओ ने बताया कि चार सुपरवाइजर के निर्देशन में 250 सफ ाईकर्मी गांव के सभी टोलों में सफाई कर रहे हैं। पिछले पांच दिन से नियमित सफ ाई चल रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मौतें होने पर सफाईकर्मी गांव में दिखाई पड़ने लगे वर्ना कभी-कभी ही आते थे।