गोरखपुर।
पूर्वांचल को इंसेफेलाइटिस से निजात दिलाने के लिए शासन ने अब जागरूकता को मुख्य हथियार बनाया है। इसके तहत सोमवार से इंसेफेलाइटिस प्रभावित गांवों में सर्वे शुरू किया गया। डीजीएमई के नेतृत्व में केजीएमयू, बीआरडी, डब्लूएचओ, यूनिसेफ और चिकित्सा-स्वास्थ्य विभाग के अफसर मिलकर सर्वे पूरा करेंगे। सोमवार को टीम ने चार गांवों का दौरा करके ग्रामीणों समेत वहां तैनात स्वास्थ्य कर्मियों से सूचनाएं जुटाई। इसके साथ ही ग्रामीणों को बीमारी के प्रति जागरूक किया गया।
1978 से पूर्वांचल में खौफ का पर्याय बनी इंसेफेलाइटिस के कारणों का पता लगाने में अभी तक स्वास्थ्य विभाग को कामयाबी नहीं मिल सकी है। इसकी चपेट में 28 जिले हैं। शासन ने अब इससे बचाव के उपाय के प्रसार पर जोर देना शुरू कर किया है। इसके तहत डीजीएमई डॉ. केके गुप्ता की अगुवाई में डॉक्टरों व छात्रों की 50 सदस्यीय टीम का गठन हुआ है। सोमवार को टीम चरगावां पीएचसी, मोहनापुर, हरसेवकपुर नंबर दो और पिपराइच सीएचसी पहुंची। टीम ने यहां ग्रामीणों और स्वास्थ्यकर्मियों से बात की। केजीएमयू के सोशल एवं प्रिवेंटिव मेडिसिन विभाग के डॉ. शिवेन्द्र कुमार सिंह की अगुवाई में 20 डॉक्टरों की टीम ने मोहनापुर में सर्वे किया। इस दौरान टीम ने 20 ग्रामीणों से 15 सवाल भी पूछे।