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अब घर बैठे करा सकेंगे संपतियों का बैनामा

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गोरखपुर।
तेजी से पेपरलेस वर्किंग की तरफ बढ़ रहा रजिस्ट्री विभाग अब इस दिशा में एक और नया कदम उठाने जा रहा है। सभी उप निबंधन कार्यालयों को कंप्यूटर से जोड़ने के बाद विभाग अब ऑनलाइन रजिस्ट्री (बैनामा) की सुविधा भी शुरू कर रहा है। पहले चरण में गोरखपुर समेत सूबे के आठ जिलों में एक अक्टूबर से यह सुविधा शुरू होगी। इनमें बाराबंकी, गाजियाबाद, जौनपुर, मथुरा, वाराणसी, बहराइच और बरेली जिले भी शामिल हैं। अगले साल तक विभाग प्रदेश के सभी जिलों में आनलाइन बैनामा शुरू कर देगा।
इस सेवा के शुरू होने से अब घर या फिर साइबर कैफे में बैठे-बैठे कोई भी जमीन, मकान या दुकान की खरीद-फरोख्त कर सकेगा। यानी अब न तो रजिस्ट्री विभाग में घंटो लाइन में खड़े होने की जरूरत पड़ेगी और न ही कैश लेकर घर से बाहर निकलने पर सुरक्षा का खतरा। इस नई व्यवस्था को लेकर इन जिलों के सभी उप निबंधकों (सब-रजिस्ट्रार) को लखनऊ में प्रशिक्षण दिया जाएगा, जो 13 और 14 सितंबर को आयोजित किया गया है। उधर ऑनलाइन बैनामों को लेकर प्रमुख सचिव निबंधन के निर्देश पर जिले में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। जिले की सभी तहसीलों की जमीनों के सर्किल रेट विभाग की वेबसाइट पर अपलोड करने के साथ ही स्टांप ड्यूटी के भुगतान आदि को लेकर भी काम किया जा रहा है।
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ऐसे करा सकेंगे आनलाइन रजिस्ट्री
बैनामे के विलेख (रजिस्ट्री डीड) तैयार कराकर विभाग की वेबसाइट igrsup.gov.in पर ऑनलाइन बैनामे के विकल्प पर क्लिक करने के बाद उसे अपलोड करेंगे। वेबसाइट पर ही सभी इलाकों की जमीन के सर्किल रेट अपलोड रहेंगे। प्रोफार्में पर इलाकों का जिक्र करते ही उसके सर्किल रेट सामने आ जाएंगे। रजिस्ट्री की फीस और स्टांप ड्यूटी का भुगतान भी बैंक से चालान या फिर ई-स्टांप के जरिए किए जा सकेंगे।
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आनलाइन बैनामे के फायदे
रजिस्ट्री दफ्तर के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी, समय बचेगा
कैश पेमेंट नहीं करना होगा, घूस भी नहीं देना पड़ेगा
विभाग में भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी

फर्जीवाड़ा रोकना बनेगी चुनौती
गोरखपुर। जिले में आनलाइन बैनामे की राह में विभाग के अफसरों के सामने फर्जीवाड़ा रोकना चुनौती साबित होगी। जमीन के असल मालिक की जगह दूसरे के द्वारा बैनामा करने के मामले हमेशा प्रकाश में आते रहते हैं। करीब तीन साल के भीतर कोर्ट के अलावा एआईजी स्टांप के स्तर से ही 50 से अधिक बैनामे निरस्त किए जा चुके हैं, जो प्रदेश में किसी भी जिले की तुलना में सबसे ज्यादा हैं। सभी मामलों में फर्जी पहचान पत्र और गवाह के सहारा लिया गया था। ऑनलाइन बैनामों में भी ऐसे पहचान पत्रों की जांच हो पाना मुश्किल साबित होगा।







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