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हड़ताल से ठप रहा बैंकों का कामकाज

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हड़ताल से ठप रहा बैंकों का कामकाज
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बैंकों के विलय समेत अन्य मांगों को लेकर बैंककर्मियों ने नहीं किया काम
क्लीयरिंग हाउस में काम नहीं होने से करोड़ों के ड्राफ्ट फंसे
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर राष्ट्रव्यापी एक दिवसीय हड़ताल से मंगलवार को बैंकों कामकाज पूरी तरह से ठप रहा। सभी बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों ने शहर के विभिन्न इलाकों में जुलूस निकाला और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। हड़ताल से लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। रकम की निकासी, बैंक ड्राफ्ट, चालान आदि का काम नहीं हुआ।
मंगलवार को विभिन्न बैंकों के अधिकारी एवं कर्मचारी सुबह 11 बजे बैंक रोड स्थित भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा पर इकट्ठा हुए। वहां से अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए विजय चौराहा, गणेश चौराहा, कचहरी चौराहा, टाउन हाल होते हुए वापस स्टेट बैंक परिसर पहुंचे। यहां आने के बाद जुलूस सभा में तब्दील हो गई। इस दौरान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के अध्यक्ष केके तिवारी ने कहा कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को निजीकरण के लिए हर हथकंडा अपना रही है। बैंकों के विलय की योजना इसी का एक हिस्सा है। जबकि हजारों करोड़ रुपये दबा कर बैठे कारपोरेट घरानों के खिलाफ सरकार कुछ नहीं कर रही है। अगर इन सभी से एनपीए वाली रकम वसूल जाए तो बैंकों की माली हालत सुधरेगी ही नहीं बल्कि बेहतर हो जाएगी। फोरम लगातार इन्हीं सब मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन करता रहा है। सरकार पर दबाव बनाने के लिए 15 सितंबर को दिल्ली मोर्चा का आयोजन किया गया है। उन्होंने सभी से दिल्ली मोर्चा को सफल बनाने का आह्वान किया। सभा को ओपी त्रिपाठी, आनंद शेखर वर्मा, बृजेश यादव, प्रशांत मिश्रा, आशुतोष सिंह, राहुल गुप्ता, एमजे श्रीवास्तव, सुशील पांडेय, ओपी सिंह, एनएन सिंह, डीएन सिंह, यूपीएन सिंह ने भी संबोधित किया। इस दौरान काफी संख्या में बैंककर्मी मौजूद थे।
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ये हैं बैंककर्मियों की प्रमुख मांगे
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण नहीं किया जाए। बैंकों के विलय की योजना को रोका जाए। कारपोरेट एनपीए को बट्टे खाते में नहीं डाला जाए। जानबूझ कर बैंक ऋण न चुकाने को फौजदारी अपराध घोषित किया जाए। एनपीए की वसूली पर संसदीय समिति की अनुशंसाओं को लागू किया जाए। बैंक बोर्ड ब्यूरो को समाप्त किया जाए। एनपीए के कारण ग्राहकों पर अतिरिक्त भार एवं सेवा शुल्क न बढ़ाया जाए। जीएसटी के नाम पर सेवा शुल्क न बढ़ाया जाए। बैंकों में कर्मचारियों एवं अधिकारियों के रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरा जाए। बैंकों में अनुकंपा के अधिकार पर नियुक्ति दी जाए आदि।
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