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एेतिहासिक इमारत बसंत सराय की दीवार गिरी

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बारिश से गिरी बसंत सराय की दीवार। - फोटो : Amar Ujala
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गोरखपुर। एतिहासिक इमारत बसंत सराय की एक तरफ की दीवार ढह गई। इसमें कोई हताहत तो नहीं हुआ, लेकिन एहतियातन नगर निगम ने इस इमारत में रहने वाले सभी लोगों को जल्द से जल्द खाली करने को कहा है। जल्द ही इस इमारत को खाली कराने की तैयारी भी शुरू हो गई है।
रविवार से लगातार हो रही बारिश से शहर के बसंतपुर इलाके में स्थित एतिहासिक इमारत बसंत सराय की दीवार गिर गई। दीवार की ईंट समेत सारा मलबा सड़क पर गिर पड़ा। गनीमत रही कि इस सड़क पर लोगों की काफी आवाजाही के बावजूद किसी को चोट नहीं आयी। जानकारी मिलने के बाद मुख्य कर निर्धारण अधिकारी रबीश चंद्र ने नगर निगम के जेई आरके मिश्रा को मौके पर भेजा। आरके मिश्रा ने बताया कि यह ऐतिहासिक इमारत काफी जर्जर स्थिति में है। एक तरफ की काफी दीवार टूट कर गिर गई। सड़क की तरफ गिरा करीब 8 ट्रैक्टर मलबा हटाया गया। अंदर भी काफी मलबा गिरा हुआ है। इसे मंगलवार को हटवाया जाएगा। इस इमारत में रहने वाले सभी लोगों को जल्द से जल्द मकान खाली करने को कहा गया है। जल्द ही इन सभी को नोटिस जारी की जाएगा।
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बसंत सराय में रहते हैं 100 परिवार
बसंतपुर के पार्षद विजेंद्र अग्रहरि ने बताया कि बसंत सराय की इस इमारत में पहले 68 परिवार रहते थे। अब इसमें करीब 100 परिवार रहते हैं। ये सभी परिवार नगर निगम को किराया भी देते हैं। बीस आना से शुरू यह किराया क्रमश: ढाई रुपये, पांच रुपये, आठ रुपये होता हुआ 16 रुपये पहुंच गया है। निश्चित तौर पर यह एक ऐतिहासिक इमारत है, लेकिन अब यह जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। ऐसे में अगर नगर निगम इनसे इमारत खाली कराता है तो इनके लिए रहने की व्यवस्था करनी होगी।
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करीब 600 साल पुरानी है यह इमारत
करीब 600 साल पहले राजा बसंत सिंह ने इस किले को ऐसा बनवाया था। इसके चारों कोनों पर सैनिकों के बैठकर निगरानी करने की व्यवस्था बनाई गई थी। यदि किसी तरह कोई किले की छत पर चढ़ गया तो उसे ढेर करने के लिए किले की छत के नीचे बने 68 कमरों में एक ऐसा झरोखा था, जिससे रोशनी तो आती ही थी। साथ ही फायर भी किया जा सकता था। डॉ. दानपाल सिंह की पुस्तक सत्तासी राजवंश में लिखा है कि बसंत किले और अन्य भवनों पर मुगल क्रूर शासक औरंगजेब के तीसरे बेटे मुअज्जम शाह ने 1608 ई. में कब्जा कर लिया था। इसके आस पास के भवनों में उसने अपनी पलटन को रखा था। इसका नाम बसंत सराय रखा गया था। उसने इसके अंदर एक मस्जिद का निर्माण करवा दिया जो कि आज भी मौजूद है। किले के अन्य हिस्सों में भी छेड़छाड़ किए जाने के प्रमाण मिलते हैं। अंग्रेजों के समय में यह किला रेड एरिया में तब्दील हो गया और यहां घुंघरूओं की आवाज गूंजने लगी थी।
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