इंसेफेलाइटिस से पीड़ित बच्चे।
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इंसेफेलाइटिस मंगलवार को तीन और लोगों को काल के गाल में खींच ले गई। इनमें गोरखपुर, संतकबीरनगर के बच्चे और बस्ती की किशोरी शामिल है।
हर बार जुलाई से अपना प्रकोप फैलाने वाले इंसेफेलाइटिस ने इस साल महीने भर पहले ही अपना भयावह रूप दिखाना शुरू कर दिया है। लगातार जिंदगियां छीनकर इस बीमारी ने सरकारी तैयारियों की कमजोरियां भी उजागर कर दी हैं। मंगलवार को गोरखपुर निवासी चार वर्षीय पलक को तेज बुखार के साथ झटके आने पर घरवाले मेडिकल कॉलेज ले आए थे। उसके अलावा शहर के दो और बच्चे बीमारी से पीड़ित होने के चलते मेडिकल कॉलेज के नेहरू चिकित्सालय स्थित इंसेफेलाइटिस वार्ड में भर्ती कराए गए थे। इलाज के दौरान इनमें से पलक की मौत हो गई।
संतकबीरनगर के चार वर्षीय अनूप को भी उसके घरवाले मंगलवार को लेकर मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे थे। इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। वहीं, पिछले दिनों वार्ड में भर्ती हुई बस्ती की ज्योति मौर्य की भी मंगलवार को मौत हो गई। कुशीनगर के तीन नए मरीज भी मंगलवार को वार्ड में भर्ती किए गए। एक दिन में तीन मौतों से वार्ड के बाहर काफी देर तक मृतकों के घरवाले रोते-बिलखते रहे। मेडिकल कॉलेज में जनवरी से अब तक इंसेफेलाइटिस से 69 मौतें हो चुकी हैं, जबकि 222 मरीज भर्ती हुए हैं। वर्तमान में 18 मरीजों का इलाज वार्ड में चल रहा है।
जून में जान गंवा चुके 11लोग
इंसेफेलाइटिस ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। एक ओर स्वास्थ्य महकमा मान रहा है कि अभी बीमारी का सीजन शुरू नहीं हुआ है तो दूसरी ओर तीन दिन में बीमारी ने छह जानें लील ली हैं। 24 जून को भी इंसेफेलाइटिस ने तीन जिंदगियां निगली थीं। स्वास्थ्य महकमा जुलाई के साथ बीमारी का खतरा बढ़ने की बात कहता है। इस लिहाज से जुलाई और अगले कुछ माह संवेदनशील माने जाते हैं। लेकिन इस बार जून में ही इंसेफेलाइटिस 11 लोगों की जिंदगी छीन चुका है।